• प्रो.डॉ.रुचिरा तिवारी और रजनीश पांडेय ने सेना को दी आजीवन सहायता
देवभूमि मीडिया ब्यूरो
देहरादून : देश और प्रदेश को लूटकर अपनी जेबें भरने वालों की जहाँ अपने देश में कोई कमी नहीं है वहीं इन्ही के बीच से निकलकर यदि एक प्रोफ़ेसर अपनी तनख्वाह से कुछ पैसा देश के  लिए अपनी जान देने वाले सैनिकों को दे तो यह अपने आप में सभी नौकरी करने वालों के लिए प्रेरणादायक तो है ही। बात पंतनगर विवि के कुक्कुट फार्म के भंडारक रजनीश पांडेय और एसोसिएट प्रो. डॉ. रुचिरा तिवारी और रजनीश पांडेय की हो रही है जिन्होंने सरहदों की सुरक्षा के लिए जान की बाजी लगाने वाले जवानों के लिए हर माह अपने वेतन में से पांच फीसदी राशि विश्व विद्यालय के माध्यम भारतीय सेना के खाते में भेजेने का निर्णय लिया है।
डॉ. रुचिरा तिवारी पंतनगर विश्व विद्यालय के कुक्कुट फार्म के भंडारक रजनीश पांडेय और एसोसिएट प्रो. डॉ. रुचिरा तिवारी ने आर्थिक सहयोग की पहल की है। मिली जानकारी के अनुसार डॉ. रुचिरा हर माह वेतन में से पांच फीसदी राशि विवि के माध्यम भारतीय सेना के खाते में भेजेंगी और यह क्रम सेवानिवृत्ति तक चलेगा। वहीं, रजनीश ने भी एक फीसदी वेतन सेना के खाते में देंने का निर्णय लिया है। हालाँकि रजनीश की पहल से ही प्रेरित होकर डॉ. रुचिका ने यह कदम उठाया है। जिसकी तारीफ की जानी चाहिए क्योंकि इस तरह के निर्णय से जहाँ देश के प्रति लोगों का जज्बा बढ़ेगा वहीं सैन्य बलों को दिए गए धन से उनका उत्साह वर्धन होगा और उन्हें लगेगा कि उनके साथ केवल देश की सरकार ही नहीं बल्कि आम जनता की भी ताकत है
डॉ. रुचिरा ने हमारे संवाददाता को बताया कि 1994 में उन्होंने विवि से एमएससी किया था जबकि वर्ष 1996-98 तक इबाराकी यूनिवर्सिटी टोकियो जापान में रिसर्चर पद पर रहीं और जनवरी 2000 में पंतनगर विश्व विद्यालय से कीट विज्ञान विभाग में पीएचडी की और फिर 2006 से विश्व विद्यालय में ही सहायक प्रोफेसर के पद पर ज्वाइनिंग हो गई थी। पिछले साल वह एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर पदोन्नत हुई।  उनके पति डॉ. मनीष श्रीवास्तव भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली में प्रिंसिपल साइंटिस्ट हैं। वे कहती हैं कि सेना की वजह से हम लोग सुरक्षित जीवन जी पाते हैं। उनका मन आर्मी के जवानों की मदद का था, लेकिन मदद की प्रक्रिया की पहले जानकारी नहीं थी। 




0 comments:

Post a Comment

See More

 
Top