प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर राफेल सौदे में बैंक गारंटी माफ कर भारतीय खजाने की कीमत पर दसॉ एविएशन को समृद्ध करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने बुधवार को कहा कि मोदी के खिलाफ भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत जांच की जानी चाहिए. भारतीय वार्ताकार दल (आईएनटी) के दस्तावेजों का हवाला देते हुए कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने यह भी दावा किया कि 36 राफेल विमानों को खरीदने के सौदे को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल द्वारा अंतिम रूप दिया गया था. इसमें इसकी कीमत भी शामिल है.

उन्होंने यह भी कहा कि अप्रैल 2015 में मोदी ने विमानों के लिए जिस कीमत की घोषणा की थी, वह संप्रग द्वारा किए गए सौदे से कही ज्यादा थी. उन्होंने प्रधानमंत्री पर संसद में कीमत के बारे में झूठ बोलने का आरोप लगाया. सुरजेवाला ने कहा, “राफेल सौदे में भ्रष्टाचार और गड़बड़ी सबके सामने आ गई है. मोदी ने दसॉ एविएशन को फायदा पहुंचाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया और लगातार सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया.”

सुरजेवाला ने यहां मीडिया को बताया, “आईएनटी के मुताबिक, नए सौदे के अंतर्गत 36 विमानों की कीमत 63,450 करोड़ रुपये है, न कि 59,175 करोड़ रुपये, जिसका भाजपा के विभिन्न मंत्री और सरकार दावा कर रही है. गौर करने वाली बात यह है कि विमानों की आपूर्ति 1.22 फीसदी मंहगाई दर के साथ 10 वर्षो में की जाएगी, जिससे विमानों की कीमत 67,500 करोड़ रुपये के पार पहुंच जाएगी.” सुरजेवाला ने कहा कि मोदी ने राफेल निर्माता दसॉ को भारतीय खजाने की कीमत पर लाभ पहुंचाने के लिए उसकी बैंक गारंटी माफ कर दी. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया जाना चाहिए.

सुरजेवाला ने कहा, “यह भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम की धारा 13 (1) (डी) का मामला है. अब वक्त प्राथमिकी के जरिए राफेल घोटाले में संलिप्त प्रधानमंत्री मोदी और अन्य के खिलाफ जांच करने का है. यह वक्त मोदी के लिए साबित करने का है कि वह दोषी नहीं हैं और उन्हें तुरंत जांच के लिए तैयार हो जाना चाहिए.” आईएनटी का हवाला देते हुए कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि सौदे को डोभाल ने अंतिम रूप दिया, जबकि उनके पास ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं था.

सुरजेवाला ने कहा, “36 विमानों की कीमत और खरीद का फैसला अजीत डोभाल ने 12-13 जनवरी, 2016 को किया था. डोभाल को कभी भी सुरक्षा संबंधित मंत्रिमंडलीय समिति ने अधिकृत नहीं किया और न ही वह आईएनटी का हिस्सा थे. संयोगवश, अनुबंध पर 13 जनवरी, 2016 को हस्ताक्षर हुए थे.”उन्होंने कहा, “जब इस बात का खुलासा हुआ तब मोदी ने रक्षा सचिव को यह कहने के लिए मजबूर किया कि पीएमओ ने अंतिम बातचीत में कोई हस्तक्षेप नहीं किया. आईएनटी रिपोर्ट के 11 पैरा में स्पष्ट किया गया है कि सौदे को उनके द्वारा नहीं, बल्कि अजीत डोभाल ने अंतिम रूप दिया.”





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