देहरादून : उत्तराखंड में तबादला कानून लागू होने के बाद भी पारदर्शी ताबदले नहीं हो रहे है, जिसको लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर त्रिवेंद्र सरकार ने जिस तबादला एक्ट को लागू किया है उसमें ऐसी क्या खामियां है जिससे उत्तराखंड में ताबदले करना टेढी खीर साबित हो रहे हैं. वहीं पूर्व शिक्षा मंत्री तबादला एक्ट निरस्त करने की बात कह रहे हैं।

तबादला कानून पर खड़े हो रहे कई सवाल 

उत्तरखंड की त्रिवेंद्र सरकार ने प्रदेश में पारदर्शी तबादले करने के लिए तबादला कानून को मंजूर तो करा दिया लेकिन फिर भी उत्तराखंड पारदर्शी तबादले नहीं हो पा रहे हैं जिससे तबादला कानून पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर ये कैसा कानून है जिससे तबादलों में कर्मचारियों को न्याय नहीं मिल रहा है। बात अगर शिक्षा विभाग की करें तो ताबदलों को लेकर हमेशा से ही विभाग में हो हल्ला मचा हुआ रहता है. जब भी शिक्षा विभाग में तबादले हुए हैं ऐसा कोई मौका नहीं रहा होगा जब विभाग में हंगामा न मचा हो. इस वर्ष भी त्रिवेंद्र सरकार ने शिक्षा विभाग में 10 प्रतिशत ताबदले किए हैं जिसके तहत करीब 3200 शिक्षकों के ट्रांसफर हुए हैं, लेकिन तबादलों में हुई विसंगति के बाद विभाग ने विवाद बढ़ते देख ट्रांसफर किए गए शिक्षकों के तबादलों पर रोक लगाते हुए कमेटी बनाई गई है जिसकी जांच के बाद ही फिर से विभाग में ताबदले होंगे.

पारदर्शी ताबदले करने के लिए एक्ट के अंदर नियमावली बननी चाहिए

लेकिन शिक्षक संगठनों के साफ तौर से कहना है कि शिक्षा विभाग उत्तराखंड का सबसे बड़ा विभाग है इसलिए पारदर्शी ताबदले करने के लिए एक्ट के अंदर नियमावली बननी चाहिए। राजकीय शिक्षक संगठन के प्रदेश महामंत्री सोहन सिंह माजिला का कहना कि शि़क्षक एक्ट का को विरोध तो नहीं कर रहे हैं लेकिन एक्ट के भीतर 27 अधिनियम के शिक्षा विभाग के लिए नियमावली बननी चाहिए,वहीं प्राथमिक शिक्षक संगठन के प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय सिंह चौहान का कहना कि बिना नियमावली के तहत कांउसलिग के विभाग में पारदर्शी तबादले नहीं हो सकते हैं।

इस बार हुए ताबदलों से शिक्षा विभाग में अफरातरफी का माहौल है और ये माहौल इसलिए पैदा हुआ है क्योंकि कई ऐसे शिक्षकों के तबादले कर दिए गए हैं जो अकेले ही एक स्कूल की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. ऐसे में उनके स्थान पर किसी शिक्षक को उनके स्थान पर सिलीव नहीं किया गया,ऐसे में वह कैसे स्कूल छोड़े ये भी सवाल उठा रहा है. कई शिक्षकों के रिटायरमेंट में कुछ महीने बचे हुए हैं. 400 से ज्यादा आपत्तियां तबादलों को लेकर दर्ज हो चुकी थी. खुद शिक्षा सचिव मिनाक्षी सुंदरम भी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि कुछ विसंगतियां ताबदलों में हुए. जिनमें सुधार के लिए कमेटी का गठन किया गया है. साथ ही आगे से इस तरह की खामियां न हो तबादला एक्ट की धारा 27 अधिनियम में मुख्यसचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी में प्रस्ताव लाया जाएगा जिससे इसमें सुधार किया जा सके।

शिक्षा विभाग में तबादला एक्ट ने बेड़ा गर्ग कर दिया है-नैथानी 

वहीं पूर्व शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी का कहना कि तबादला एक्ट कर्मचारियों के हित में नहीं है और शिक्षा विभाग में तबादला एक्ट ने बेड़ा गर्ग कर दिया है,इसलिए वह कहना चाहते है कि एक्ट का निरस्त कर ना ही कर्मचरियों के लिए फायदे मंद है।

उत्तराखंड में त्रिवेंद्र सरकार आने के बाद सरकार की पहली प्राथमिकता ताबदला एक्ट को लागू करना था,सरकार ने एक्ट लागू भी कर दिया,लेकिन शिक्षा विभाग में एक्ट लागू होने से पारदर्शी तरिके से तबादले नहीं हो पा रहे है ऐसे में देखना ये होगा कि आखिर सरकार इसके लिए क्या समाधान ढुंढती है।





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