देहरादून : दिन बा दिन उत्तराखंज रोडवेज बस चालकों के किस्से सुनने में आ रहे हैं इससे उत्तराखंड के लोगों में रोष है. लेकिन विभाग कि ढिलाई के कारण ही बस चालक दुस्साहस कर रहे है. अगर परिवहन निगम सख्त नियम बनाकर सख्त कार्रवाई करें तो शायद चालकों की इस हरकत पर लगाम लग सके. जी हां 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि फिर से रोडवेज बस चालक के शराब पीने का मामला सामने आया है औऱ इस बार चालक ने ढाबे रोककर शराब पी और इतनी पी कि बस नहीं चला पाया.

24 घंटे के अंदर दूसरा मामला

गौर हो की बीते दिन भी ऐसा ही मामला सामने आया था जिसमे चालक शराब के नशे में बस घुमाता पाया गया औऱ आखिर कार यात्री ने मोर्चा संभालते हुए बस को रुद्रपुर पहुंचाया. वहीं 24 घंटे के अंदर फिर से ऐसा ही मामला सामने आया है. बता दें पिथौरागढ़ मार्ग पर शराबी चालक पकड़ा गया।

फिर से नशे में धुत मिला चालक, यूपी पुलिस ने किया गिरफ्तार

मिली जानकारी के अनुसार पिथौरागढ़ की डिपो बस (यूके07पीए-2147) सोमवार की रात दिल्ली से पिथौरागढ़ के लिए चली. रास्ते में चालक ने खाने के लिए बस रामपुर में रेस्तरां में रोकी और इस दौरान चालक ने शराब पी ली. चालक नशे में इस कदर धुत हो गया कि बस संचालन लायक नहीं रहा। गनीमत यह रही कि परिचालक ने सूझबूझ दिखाते हुए अफसरों को सूचना दे दी। यूपी पुलिस ने आरोपित चालक को गिरफ्तार कर लिया। हल्द्वानी डिपो से दूसरा चालक मौके पर भेजा गया। इस वजह से यात्री तीन घंटे वहीं खड़े रहे। रोडवेज प्रबंधन ने आरोपित संविदा चालक को बर्खास्त कर दिया है।

परिचालक ने दिखाई सूझबूझ

इस पर परिचालक गणेशचंद्र पांडे ने एजीएम पिथौरागढ़ को फोन कर सूचना दी। एजीएम ने तुरंत पुलिस बुलाकर चालक को गिरफ्तार कराने के निर्देश दिए व बताया कि वह दूसरा चालक मौके पर भेज रहे हैं। परिचालक ने डॉयल 100 पर फोन कर यूपी पुलिस को सूचना दी। पुलिस वहां पहुंची और आरोपित चालक को गिरफ्तार कर लिया। करीब तीन घंटे बाद हल्द्वानी से दूसरा चालक मौके पर पहुंचा और बस को पिथौरागढ़ ले गया। रोडवेज के महाप्रबंधक संचालन दीपक जैन ने बताया कि आरोपित संविदा चालक राजू कुमार को बर्खास्त कर दिया गया है। चूंकि, परिचालक ने सूझबूझ का परिचय दिया, लिहाजा उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

चालक यात्रियों की जिंदगी से खुलेआम खिलवाड़ कर रहे हैं, कहां हैं एजीएम?

आए दिन अब चालकों के ऐसे मामले सामने आने लगे हैं, चालक यात्रियों की जिंदगी से खुलेआम खिलवाड़ कर रहे हैं लेकिन परिवहन निगम चुप है. बड़ा सवाल ये भी है कि आखिर एजीएम क्या कर रहे हैं? वो कहां आराम फरमा रहे हैं? आखिर क्यों वो चालकों को चैकिंग नहीं कर रहे हैं क्या जनता की जान इतनी सस्ती है?न बस अड्डे पर चालकों या परिचालकों की जांच हो रही, न किसी मार्ग पर। बड़ा सवाल ये भी है कि जब प्रवर्तन टीम बसों को रोककर यात्री टिकट की जांच तक नहीं कर रही तो शराब प्रकरण में जांच कैसे करेगी। इस पर जरुर सरकार औऱ निगम को सख्त रुख अपनाने की जरुरत है.





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