मुंबई की एक अदालत ने गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी को आरएसएस के एक कार्यकर्ता द्वारा दायर मानहानि मामले के संबंध में 15,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी है. पार्टी के एक नेता ने यह जानकारी दी. जमानती राशि अदालत में सुनवाई के दौरान राहुल के साथ मौजूद मुंबई के पूर्व सांसद एकनाथ गायकवाड़ ने दी.

इससे पहले, संक्षिप्त सुनवाई के दौरान राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक कार्यकर्ता द्वारा उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के संबंध में कहा कि वह दोषी नहीं हैं.

आरएसएस कार्यकर्ता धृतिमान जोशी ने राहुल के खिलाफ बेंगलुरू की पत्रकार गौरी लंकेश की 2017 में हुई हत्या का संबंध दक्षिण-पंथी संगठन से जोड़ने का आरोप लगाते हुए मानहानि का मामला दायर किया था.

जोशी ने 2017 में अपनी याचिका में तर्क दिया था कि लंकेश की हत्या के मुश्किल से 24 घंटों के बाद ही राहुल गांधी ने ट्वीट कर पत्रकार की हत्या के लिए कथित रूप से आरएसएस और उसकी विचारधारा को जिम्मेदार ठहरा दिया था.

जोशी की शिकायत में लिखा था, “सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए आरोपी (राहुल) ने अनावश्यक रूप से आरएसएस का नाम घसीटा और यह कदम लोगों के मन में आरएसएस के खिलाफ नकारात्मक विचार लाने के उद्देश्य से उठाया गया है.”

शिकायत में आगे लिखा था कि आरोपी और संबंधित दलों के बयान पूरी तरह से मानहानिकारक हैं और जनता की नजर में आरएसएस की छवि बिगाड़ते हैं, जो आरोपी द्वारा बिना किसी सबूत के आरएसएस की छवि को बिगाड़ने का सोचा समझा कदम है.

पार्टी के मुंबई इकाई के अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा ने मीडिया से कहा कि मुंबई में गांधी केवल शिवड़ी मेट्रोपोलिटन अदालत में सुनवाई में शामिल होने आए हैं और इसके बाद वे दिल्ली लौट जाएंगे.

महाराष्ट्र में राहुल गांधी के खिलाफ किसी आरएसएस कार्यकर्ता द्वारा दायर की गई यह दूसरी याचिका है. राहुल गांधी केरल के वायनाड से लोकसभा सांसद हैं.

इससे पहले 2014 में, एक स्थानीय कार्यकर्ता राजेश कुंते ने महात्मा गांधी की हत्या के लिए कथित रूप से आरएसएस पर आरोप लगाने के लिए राहुल के खिलाफ याचिका दायर की थी. वह मामला ठाणे में भिवंडी अदालत में लंबित है.

देवड़ा, नगर के पूर्व अध्यक्ष संजय निरूपम और अन्य नेताओं की अगुआई में बड़ी संख्या में कांग्रेसी कार्यकतार्ओं ने मुंबई हवाईअड्डे पर अध्यक्ष पद छोड़न के बाद पहली बार यहां आए राहुल गांधी का स्वागत किया.

मजगांव में स्थित अदालत तथा मार्गों पर पार्टी के झंडे लेकर और नारेबाजी करते हुए हजारों लोग खड़े होकर उनसे इस्तीफा वापस लेने के लिए कह रहे थे.





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