देहरादून: कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के बाद राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने भी अपना इस्तीफा दे दिया। हरीश रावत के बाद आज किसान कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष गोपाल सिंह रावत ने भी इस्तीफा दे दिया है। इस ताजा घटनाक्रम के बाद सियासी गलियरों में ये सवाल उठने लगा है कि आखिर उत्तराखंड कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह कब इस्तीफा देंगे ?

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह इस लोकसभा चुनाव में खुद भी टिहरी लोकसभा सीट से पार्टी प्रत्याशी रहे। प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते उन पर दोहरी जिम्मेदारी थी, लेकिन वो अपनी सीट बचा पाना तो दूर। चकराता विधानसभा को छोड़ प्रीतम सिंह किसी भी विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी से काफी पिछड़े नजर आए। जबकि टिहरी सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह के खिलाफ लोगों में काफी गुस्सा था। बावजूद इसके प्रीतम सिंह जीत के आसपास भी नहीं पहुंच पाए। इतना ही नहीं कांग्रेस प्रदेश प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह को लेकर भी कांग्रेस संगठन में सवाल उठने शुरू हो गए हैं।

कहा जा रहा था कि नैनीतिक जिम्मेदारी लेते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अपने पद से इस्तीफा दे देंगे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। संगठन के लिहाज से भी उनकी काबिलियत पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अपने कार्यकाल में वो प्रदेश कार्यकारिणी का विस्तार तक समय रहते नहीं कर पाए, जिसका नुकसान सीधेतौर पर पार्टी को उठाना पड़ा। हालांकि प्रीतम सिंह दावा करते रहे हैं कि उन्होंने प्रदेश सरकार को हर मोर्चे पर घेरा और जनता के सवालों को मजबूती से उठाया।

अब जिस तरह से लगातार इस्तीफों को दौर शुरू हो गया है। सियासी गलियारों में सवाल तेजी से तैरने लगा है कि प्रीतम सिंह कब इस्तीफा देंगे। क्या प्रदेश कार्यकारिणी को भंग कर नई कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा, जैसा राष्ट्रीय स्तर पर करने की कवायद भी तेज हो रही है। राहुल गांधी भी कह चुके हैं कि पार्टी को पूरी तरह नये ढंग से खड़ा किया जाएगा। अब देखना होगा कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह इस्तीफा देते हैं या अपने पद पर ही बने रहते हैं।





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