ऋषिकेश: लक्ष्मणझूला पुल ऋषिकेश की एक पहचान है। 1929 में बना ये पुल अब चलने लायक नहीं रहा। इस पुल की ताजा रिपोर्ट कहती है कि पुल पर चलना खतरे से खाली नहीं है। किसी भी समय पुल टूट सकता है। लोक निर्माण विभाग ने यह रिपोर्ट शासन को भेज दी है।

कावंड़ रूट

लोक निर्माण विभाग की इस रिपोर्ट के बाद कावंड़ियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। एक तरफ लोनिवि ने यह रिपोर्ट दी है कि लक्ष्मणझूला पुल अब चलने लायक नहीं रहा है। दूसरी और प्रशासन ने कांवड़ियों के नीलकंठ जाने के लिए लक्ष्मणझूला पुल से होकर ही नीलकंठ जाने का रूट तय किया है।

कावंड़ियों की सुरक्षा पर सवाल

हाल ही में किए गए तकनीकी सर्वे किया गया, जिसमें पुल की लोडिंग क्षमता और आयु आदि की जांच की गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 90 साल पहले के डिजाइन और क्षमता के हिसाब से पुल आज इस स्थिति में नहीं है कि इस पर अब बड़ी संख्या में लोग आवाजाही कर सकें। ऐसी स्थिति में अगर पुल पर कावंड़ियों को हुजूम उमड़ता है, तो वो खतरे से खाली नहीं होगा। अब सवाल ये उठ रहा है कि क्या कावंड़ियों के नीलकंठ जाने का रूट बदला जाएगा।

90 साल पुराना पुल

लक्ष्मणझूला पुल का निर्माण 1929 में हुआ था, जिसे आवाजाही के लिए 1930 में खोला गया था। करीब 90 साल पुराने इस पुल समेत 1986 में बने रामझूला पुल का पीडब्ल्यूडी के डिजाइनर पीके चमोली ने कुछ दिन पहले तकनीकी सर्वे किया था।





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