शुक्रवार को साढ़े चार घंटे से अधिक की देरी के बाद समझौता एक्सप्रेस  राष्ट्रीय राजधानी पहुंची. भारत द्वारा जम्मू एवं खश्मीर में अनुच्छेद 370 को रद्द करने के फैसले को लेकर पाकिस्तान के सीमा पार से शांति ट्रेन को स्थायी रूप से निलंबित करने के बाद यह इसका अंतिम परिचालन माना जा रहा है.

जानकारी के मुताबिक, समझौता एक्‍सप्रेस शुक्रवार  सुबह डेढ़ बजे अटारी रेलवे स्‍टेशन से रवाना हुई थी और अपने तय समय से साढ़े 4 घंटे देरी से दिल्ली पहुंची. कुल 117 यात्रियों में 76 भारतीय और 41 पाकिस्तानी यात्री शामिल हैं. गौरतलब है कि गुरुवार को पाकिस्तान की ओर से समझौता एक्सप्रेस रद्द कर दिया गया था और ट्रेन को अटारी रेलवे स्टेशन पर छोड़कर पाकिस्तानी ड्राइवर और गाइड अपने वतन वापस लौट गए थे.

पाकिस्तान ने भारत द्वारा जम्मू एवं कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाली धारा 370 को रद्द करने के फैसले के बाद के बुधवार को नई दिल्ली के साथ राजनयिक संबंधों के दर्जे को कम करने की घोषणा की. इस्लामाबाद ने भारतीय उच्चायुक्त को भी निष्कासित कर दिया और नई दिल्ली के साथ द्विपक्षीय व्यापार को निलंबित कर दिया.

18 साल के कमल वोहरा अपनी मां और बहन के आने का गुरुवार रात से बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. दोनों लगभग ढाई महीने पहले इस्लामाबाद में रहने वाले उनके नाना-नानी से मिलने पाकिस्तान गए थे.

वोहरा तब से चिंतित थे जबसे पाकिस्तान ने ट्रेन को निलंबित करने की घोषणा की और गुरुवार सुबह से जब मां और बहन से संपर्क नहीं हो पा रहा था तो उनकी चिंता और बढञ गई. दोनों के अटारी पहुंचने के बाद वह गुरुवार शाम उनसे बात कर पाए.

इससे पहले जब लाहौर से शांति ट्रेन गुरुवार शाम वाघा बॉर्डर (पाकिस्तान की ओर) तो यात्री इस बात से अनजान थे कि सेवा निलंबित कर दी गई है.

दिल्ली पहुंचने वाले अधिकांश यात्रियों ने कहा कि वे वाघा में घंटों तक फंसे रहे और उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा था. उन्हें नहीं पता था कि क्या उन्हें वापस भेजा जाएगा और वे अपने परिवारों से संपर्क करने में असमर्थ थे.

उन्होंने कहा कि उन्हें दिल्ली जाने के लिए ट्रेन में चढ़ने के लिए भारत की ओर अटारी सीमा की ओर पहुचंना पड़ा.





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