हिमाचल प्रदेश में लगातार भारी बारिश के बाद हुए भूस्खलनों, सड़कें टूटने और बांध से अतिरिक्त पानी छोड़े जाने के कारण सैकड़ों लोग फंस गए हैं. अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी. उफनती ब्यास नदी के किनारे बड़े पैमाने पर हुए भूस्खलनों के कारण मंडी और कुल्लू शहरों के बीच चंडीगढ़-मनाली राजमार्ग पर यातायात बाधित हो गया है.

एक सरकारी प्रवक्ता ने मीडिया को यहां बताया कि राज्यभर में 68 सड़कों पर यातायात बाधित है और चंबा जिले में सबसे अधिक 47 सड़कें बाधित हैं. मंडी-जोगिंदरनगर राजमार्ग को यातायात के लिए बंद कर दिया गया है. बाढ़ के कारण कुल्लू शहर के पास एक पुल बह गया.

उन्होंने आगे बताया कि एहतियात के तौर पर सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड (एसजेवीएनएल) के 1,500 मेगावाट के नाथपा झाकरी प्लांट, जो कि किन्नौर जिले में स्थित है और भारत का सबसे बड़ा हाईड्रो प्रोजेक्ट है, उससे अतिरिक्त पानी छोड़ा गया, जिससे सतलुज नदी में बाढ़ आ गई.

बिलासपुर जिले के घुमारवीं में आठ परिवारों और उनके पशुधन को इलाके में बाढ़ के कारण उनके घरों से निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया.

पुलिस ने कहा कि चंबा जिले में लोना ग्राम पंचायत में हुए भूस्खलन में एक 70 वर्षीय व्यक्ति सहित दो लोग लापता हो गए हैं. चट्टानों से टूटकर गिरे भारी पत्थरों से उनका घर भी टूट गया है.

अधिकारियों ने बताया कि पोंग बांध से 112 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पंडोह डायवर्जन बांध से एहतिहात के तौर पर अतिरिक्त पानी छोड़ा गया. बांध से छोड़े गए पानी की मात्रा एक लाख क्यूसेक थी.

पूरे कांगा जिले में बीते दो दिनों से लगातार भारी बारिश हो रही है. यहां के मौसम विभाग के एक अधिकारी ने कही कि, राज्य के अधिकांश स्थानों सहित कांगड़ा और चंबा जिलों में बीते 24 घंटों में बहुत भारी बारिश हुई है.

प्रवक्ता ने कहा कि किन्नौर, शिमला, कुल्लू, मंडी, बिलासपुर और सिरमौर जिलों में सतलुज, ब्यास और यमुना नदी और उनकी सहायक नदियां फिर से अपने उफान पर हैं.

मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के कुछ स्थानों पर सोमवार तक भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है.





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