देहरादून : आज पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा है. देश को आजाद करने में कई लोगों ने सेना के जवानों ने अपनी जान की कुर्बादी. आज पूरा देश उन्हें सलाम कर रहा है. आजादी का जश्न का एक अलग ही मजा है. सीना तान कर गर्व से हर कोई आज देश का झंडा फहरा कर फक्र महसूस कर रहा है.

शहीद मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल को शौर्य चक्र और शहीद मेजर चित्रेश बिष्ट को सेना मेडल

वहीं बात करे बहादुरी और देश की रक्षा की तो उत्तराखंड के जवान हमेशा से देश की सेवा के लिए कुर्बानी के लिए आगे रहे हैं. वहीं आज खुशी का दिन है. जी हां पुलवामा हमले में शहीद मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल और शहीद मेजर चित्रेश बिष्ट की वीरता को मरणोपरांत सम्मान मिला है। आपको बता दें कि दोनों शहीद देहरादून के थे औऱ इसी साल फरवरी में देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए थे।

शहीद मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल को शौर्य चक्र और शहीद मेजर चित्रेश बिष्ट को सेना मेडल के लिए चुना गया औऱ सम्मान मिला. आज पूरा देश औऱ उत्तराखंड फक्र महसूस कर रहा है

आईईडी डिफ्यूज करते हुए शहीद हुए थे चित्रेश बिष्ट

आपको बता दें कि मूलरूप से अल्मोड़ा जिले के रानीखेत तहसील के अंतर्गत पिपली गांव निवासी मेजर चित्रेश बिष्ट आईईडी को डिफ्यूज करते हुए शहीद हो गए थे. इसी वर्ष 16 फरवरी को राजौरी के नौसेरा सेक्टर में आतंकियों ने एलओसी पार कर यहां इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस लगा दिया। सूचना मिलने पर इंजीनियरिंग कोर में तैनात मेजर चित्रेश ने सैन्य टुकड़ी के साथ सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया। चित्रेश बम डिफ्यूज करते हुए शहीद हो गए थे. बता दें कि चित्रेश बिष्ट की 28 दिन बाद 7 मार्च को शादी होनी थी.चित्रेश बिष्ट का परिवार पिछले कई वर्षों से देहरादून की ओल्ड नेहरू कॉलोनी में रहा रहा है।

तीन बहनों की इकलौते भाई थे मेजर

वहीं मेजर वीएस ढौंडियाल पुलवामा में आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे. उन्हें गोली लग गयी थी और वो गंभीर घायल हो गए थे जिन्होंने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. पूरा देश और उत्तराखंड उस दिन सकते में था. वीएस ढौंडियाल की शादी 8 महीने पहले कश्मीरी पंडित निकिता कौल से हुई थी. मेजर का परिवार राजपुर रोड स्थित डंगवाल मार्ग पर रहता है. शहीद मेजर तीन बहनों के इकलौते भाई थे.





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