देहरादून : सरकारी सेवाओं में पदोन्नति पर पहले रोक लगाने और फिर सरकारी सेवाओं में सीधी भर्ती को लेकर आरक्षण का नया रोस्टर जारी होने के बाद सरकार के अंदर तनातनी बढ़ गई है. ये तनातनी मंत्रियों के बीच दिखाई देनी शुरु हो गई है.

जी हां मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार के इस फैसले से परिवहन व समाज कल्याण मंत्री यशपाल आर्य खफा हो गए हैं. खबर है की यशपाल आर्य ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के समक्ष इस्तीफे की पेशकश की है। इससे सरकार की मुश्किलें बढ़ गई है. कैबिनेट मंत्री नाराज हो गए हैं और उन्होंने इस्तीफे की धमकी दी है.

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ट्वीट कर कहा कि पदोन्नति में आरक्षण के रोस्टर का परीक्षण करने को कैबिनेट सब कमेटी गठित की जाएगी। सब कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सरकार आगे फैसला लेगी। उन्होंने कहा कि पदोन्नतियों में लगी रोक को शीघ्र खोला जाएगा।

आपको बता दें कि आरक्षण के नए रोस्टर में सीधी भर्ती में अनुसूचित जाति के लिए पहला पद खिसककर छठे स्थान पर चला गया। आरक्षित वर्गों के कार्मिकों के संगठन ने इसका विरोध किया। उन्होंने आरक्षित वर्गों के विधायकों के साथ ही समाज कल्याण मंत्री यशपाल आर्य के समक्ष भी विरोध जताया। इसके बाद यशपाल आर्य ने कैबिनेट के फैसले का शासनादेश जारी नहीं करने के संबंध में सरकार और कार्मिक को पत्र लिखा। सूत्रों के मुताबिक सरकार की ओर से उक्त मामले को दोबारा कैबिनेट सब कमेटी को सौंपने का भरोसा काबीना मंत्री आर्य को दिया गया। बीती 11 सितंबर को कैबिनेट के एजेंडे में इस विषय के शामिल नहीं होने और नए आरक्षण रोस्टर के आदेश ने आर्य की नाराजगी को बढ़ा दिया।

यशपाल आर्य के आवास पर मनाने पहुंचे लेकिन नहीं मिले आर्य

खबर है कि बीते दिनों चली कैबिनेट बैठक के बाद मंत्री आर्य ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मुलाकात कर अपना इस्तीफे देने की पेशकश की है। उस वक्त वहां चार मंत्री और अधिकारी भी मौजूद थे। काबीना मंत्री आर्य के वहां से जाते ही मुख्यमंत्री ने मनुहार की कोशिशें भी तेज कर दीं। आनन-फानन एक वरिष्ठ मंत्री को वार्ता के लिए आर्य के पास भेजा गया। वरिष्ठ मंत्री सीधे यशपाल आर्य के यमुना कालोनी स्थित आवास पहुंचे, लेकिन आर्य उनसे नहीं मिले।





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