देहरादून : केंद्र सरकार के नए मोटर व्हीकल एक्ट को लेकर भारत के कई जगहों पर विरोध किया जा रहा है. अब इस एक्ट में उत्तराखंड सरकार ने कैबिनेट बैठक में संशोधन का फैसला किया. राज्य सरकार ने केंद्र के नए मोटर व्हीकल एक्ट के कुछ नियमों की जुर्माना राशि में करीब 50 फीसदी तक की कटौती की है. वहीं कुछ नियमों में जुर्माना राशि में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

दारोगा नहीं कांस्टेबल चालान बुक लिए कर रहे चालान

लेकिन फिर भी कई जगहों से शिकायतें आ रही है कि पुलिस मनमानी पर उतर आई है. दारोगा तो छोड़िए कांस्टेबल तक चालान बुक लिए चालान करने सामने आ रहे हैं जबकि नियम है कि सब-इंस्पेक्टर से नीचे के रैंक के अधिकारी-कर्मचारी चालान काटने के हकदार नहीं है ये जुर्म है. उस अधिकारी को मौके पर होना जरुरी है. लेकिन कई जगहों पर कांस्टेबल अधिकारी की साइन की हुई बुक लेकर चालान कर रहे हैं. कइयों का चालान करने का हक पुलिस का नहीं है लेकिन फिर भी पुलिस चालान कर रही है.

इनका चालान नहीं काट सकती पुलिस

 उन्होंने बताया कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत पुलिस किसी भी भार वाहन का ओवरलोडिंग में चालान नहीं काट सकती। यह अधिकार केवल परिवहन विभाग के पास है।

शहर में पुलिस के चालान रिकार्ड पर गौर करें तो ओवरलोडिंग में ट्रक, डंपर और लोडर तक के धड़ल्ले से चालान पुलिस काट रही है। एआरटीओ के अनुसार पुलिस किसी यात्री वाहन को रोक उसका परमिट जांचने का भी अधिकार नहीं है। ना ही पुलिस परमिट को लेकर चालान काट सकती है।

देना होगा 15 दिन का समय

एआरटीओ अरविंद पांडे ने जानकारी देते हुए बताया कि अगर पुलिस प्रदूषण कागज की जांच करती है और चालान काटती भी है तो नियमानुसार उसे प्रदूषण प्रमाण पत्र पेश करने के लिए सात दिन और अन्य कागजों को लेकर पंद्रह दिन का वक्त वाहन स्वामी को देना चाहिए। अगर इस दौरान कागजात पेश कर दिए जाते हैं तो जुर्माना नहीं वसूला जा सकता।

पुलिस ऐसे में नहीं काट सकती चालान

वहीं बात करें रेड लाइट की अगर कहीं पर ट्रैफिक लाइट खराब है और ऐसे में कोई ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन कर निकल जाता है तो पुलिस को उसका चालान करने का अधिकार नहीं है.हां अगर रेड लाइट न होने या रेड लाइट के काम न करने पर पुलिसकर्मी यातायात संचालन कर रहा है तो कानून में उसके इशारे के अनुसार ही वाहन चलाने का प्रावधान है.

आपका अधिकार

अगर पुलिस वाहन चेकिंग के दौरान या चालान करते हुए आपका वीडियो बना रही है तो आप भी अपने मोबाइल या कैमरे पर उसका वीडियो बना सकते हैं। लेकिन, इस दौरान सरकारी कार्य में बाधा न पहुंचाएं।

आपका अधिकार

अगर पुलिस आपका एल्कोहल टेस्ट कर रही है और बार बार एक ही पाइप का प्रयोग कर सबका एल्कोहल टेस्ट कर रही है तो आपका अधिकार है कि आप पुलिस को टोक सकते हों. क्योंकि अगर किसी को कोई गंभीर बिमारी हो तो वो बिमारी आपको भी लग सकती है. पुलिस अगर इस टेस्ट में एक ही पाइप का बार-बार इस्तेमाल करती है तो ये नियमानुसार गलत है। नियम में यह भी है कि अगर कोई एल्कोमीटर पर जांच कराने से इन्कार कर रहा है तो उसका अस्पताल में मेडिकल कराना चाहिए, लेकिन इसका भी पालन नहीं किया जाता।





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