देहरादून: इसे अंधेरगर्दी नहीं तो क्या कहा जाए ? आठ हजार स्टूडेंट ग्रेजुएशन पास करने के बाद भी पोस्ट ग्रेजुएशन में एडमिशन नहीं ले पाए। उसके लिए जिम्मेदार कोई और नहीं, बल्कि वो विश्वविद्यालय हैं, जिन विश्वविद्यालयों ने छात्रों रिजल्ट ही समय से नहीं दिया। सभी स्टेडेंट अच्छे नंबबरों से पास भी हैं। बावजूद वो पीजी में एडमिशन नहीं ले पाए। इसके लिए संबंधित विश्वविद्यालय के जिम्मेदारी अधिकारी पर कार्रवाई होनी चाहिए थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ।

प्रदेश में दो साल पहले प्राइवेट परीक्षाएं खत्म होने और रेगुलर कॉलेजों में पीजी की कम सीटों के चलते पीजी दाखिलों का भार मुक्त विवि पर बढ़ गया था। पिछले साल कुछ पाठ्यक्रमों की मान्यता न मिलने की वजह से छात्रों का साल बर्बाद हुआ था। इस साल श्रीदेव सुमन विवि, कुमाऊं विवि, गढ़वाल विवि में ग्रेजुएशन अंतिम वर्ष का परिणाम न आने की वजह से पीजी दाखिलों का मौका हाथ से निकल गया ।

ग्रेजुएशन फाइनल के आठ हजार से ज्यादा छात्रों का परिणाम नहीं आ पाया है। जबकि रेगुलर कॉलेजों में पीजी में एडमिशन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। छात्रों के पास मुक्त विश्वविद्यालय का भी एक मौका रहता है, लेकिन वहां भी एडमिशन होने बंद हो चुके हैं। अब ये छात्र परेशान घूम रहे हैं। उच्च शिक्षा विभाग भी अपनी गलतियों की सजा छात्रों को दे रहा है।





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