दिवाली के दिन पूजा पाठ का विशेष महत्व होता है. इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी और बुद्धि के देवता गणेश भगवान की पूजा अर्चना की जाती है. माना जाता है कि इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से साल भर धन का प्रवाह और घर में खुशियां बनी रहती हैं. इस दिन लोग दीये, मोमबत्ती और झालर से घर की सजावट करते हैं. कई घरों में तो इस त्यौहार की तैयारियां एक महीने पहले से ही शुरू हो जाती हैं. मान्यता है कि दिवाली से पहले घरों की साफ सफाई इसलिए की जाती है क्योंकि दिवाली के दिन मां लक्ष्मी घर में आती हैं और अगर घर साफ न हो तो वो रूठ जाती हैं.

इससे कुछ दिनों पहले लोग सोने चांदी के गहने, बर्तन और दिवाली की पूजा के लिए मिट्टी के लक्ष्मी गणेश और प्रसाद के लिए खील और बताशे की खरीददारी करते हैं. दिवाली की पूजा कुछ सामानों के बिना अधूरी मानी जाती है. ऐसे में बेहतर है कि पूजा में इस्तेमाल होने वाले सामान की खरीददारी पहले से ही कर ली जाए ताकि आखिरी समय पर कोई भागदौड़ न करनी पड़े और आपकी पूजा अधूरी न रह जाए:

दिवाली पूजा सामग्री लिस्ट:

पीतल का दिया, रुई की बत्ती, अक्षत (चावल), पानी वाला नारियल, कमल के दो फूल, गुलाल, हल्दी, मेहंदी, चूड़ी, काजल, रुई, रोली, सिंदूर, सुपारी, पान के पत्ते, पुष्पमाला, पंच मेवा, गंगाजल, शहद, शक्कर, शुद्ध घी, दही, दूध, ऋतुफल, गन्ना, सीताफल, सिंघाड़े,पेड़ा, मालपुए, इलायची(छोटी),लौंग, इत्र की शीशी, कपूर, केसर, सिंहासन , पीपल, आम और पाकर के पत्ते, औषधि जटामासी, शिलाजीत, लक्ष्मीजी की मूर्ति, गणेशजी की मूर्ति, सरस्वती का चित्र, चाँदी का सिक्का, लक्ष्मी-गणेशजी को चढ़ाने के लिए लाल या पीले रंग के वस्त्र, जल कलश, सफेद कपड़ा, लाल कपड़ा,पंच रत्न, दीपक, दीपक के लिए तेल, पान का बीड़ा, श्रीफल,कलम, बही-खाता, स्याही की दवात, पुष्प(गुलाब एवं लाल कमल), हल्दी की गांठ , खड़ा धनिया, खील-बताशे, अर्घ्य पात्र सहित अन्य सभी पात्र, धूप बत्ती, चंदन.

साभार -न्यूज़ 18





0 comments:

Post a Comment

See More

 
Top