दिवाली पर जियो के ग्राहकों को झटका लगा है. दरअसल टर्मिनेशन शुल्क खत्म करने के फैसले पर ट्राई द्वारा पुनर्विचार करने के बाद जियो शुल्क लेने को बाध्य है. जियो नेटवर्क से अन्य ऑपरेटरों के नेटवर्क पर किए गए कॉल पर 6पैसा प्रतिमिनट इंटरकनेक्ट यूसेज चार्ज चार्ज का भुगतान करना होगा.

इंटरकनेक्ट यूसेज चार्ज के जीरो होने तक ही टॉप-अप वाउचर के माध्यम से टर्मिनेशन शुल्क लिया जाएगा . हालांकि ग्राहकों को इंटरकनेक्ट यूसेज चार्ज टॉप-अप वाउचर के मूल्य के बराबर का डेटा फ्री में मिलेगा.

इंटरकनेक्ट यूसेज चार्ज एक मोबाइल टेलिकॉम ऑपरेटर द्वारा दूसरे को भुगतान की जाने वाली रकम है. जब एक टेलीकॉम ऑपरेटर के ग्राहक दूसरे ऑपरेटर के ग्राहकों को आउटगोइंग मोबाइल कॉल करते हैं तब इंटरकनेक्ट यूसेज चार्ज का भुगतान कॉल करने वाले ऑपरेटर को करना पड़ता है.

दो अलग-अलग नेटवर्क के बीच ये कॉल मोबाइल ऑफ-नेट कॉल के रूप में जानी जाती हैं. भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई ) द्वारा इंटरकनेक्ट यूसेज चार्ज शुल्क निर्धारित किए जाते हैं और वर्तमान में यह 6 पैसे प्रति मिनट हैं.

ट्राई के रुख और पहले से ही इंटरकनेक्ट यूसेज चार्ज को शून्य तक कम करने वाले नियमों में किए गए संशोधन के आधार पर, जियो ने अपने ग्राहकों को मुफ्त वॉयस कॉल की सुविधा देने के लिए एयरटेल और वोडाफ़ोन-आईडिया आदि को अपने स्वयं के संसाधनों से इंटरकनेक्ट यूसेज चार्ज का भुगतान जारी रखा. अब तक, पिछले तीन वर्षों में जियो ने अन्य ऑपरेटरों को इंटरकनेक्ट यूसेज चार्ज शुल्क के रूप में लगभग 1,3,500 करोड़ रुपये का भुगतान किया है.

दुर्भाग्य से, 2017 में उपरोक्त आदेश के बाद, पुराने ऑपरेटरों ने अपने 4 जी ग्राहकों के लिए तो वॉयस टैरिफ कम कर दिया पर उन्होंने अपने 35-40 करोड़ 2 जी ग्राहकों के लिए मंहगे टैरिफ जारी रखे. असल में वॉयस कॉल के लिए टैरिफ बढ़ाकर लगभग रु 1.50 मिनट तक कर दिया गया. वे अपने 2 जी ग्राहकों से डेटा के लिए न्यूनतम 500/जीबी तक का शुल्क वसूल करते हैं.

जियो नेटवर्क पर मुफ्त वॉयस कॉलिंग और 2G नेटवर्क पर अत्यधिक टैरिफ होने की वजह से एयरटेल और वोडाफ़ोन-आईडिया के 35 – 40 करोड़ 2G ग्राहक, जियो ग्राहकों को मिस्ड कॉल देते हैं. जियो नेटवर्क पर रोजाना 25 से 30 करोड़ मिस्ड कॉल प्राप्त होते हैं. अब होता यह है कि जियो नेटवर्क पर मिस्ड कॉल होने से जियो ग्राहक वापस आउटगोइंग कॉलिंग करता है.

अन्य नेटवर्क से जियो पर रोजाना होने वाले 25 से 30 करोड़ कॉलिंग (मिस्ड कॉल) से जियो को 65 से 75 करोड़ मिनट इनकमिंग ट्रैफिक मिलना चाहिए था. पर इसके बजाय, जियो ग्राहकों द्वारा किए गए कॉल बैक के परिणामस्वरूप 65 से 75 करोड़ मिनट तक आउटगोइंग ट्रैफ़िक हो जाता है.

अगर मिस्ड कॉल की घटनाओं को निकाल दें तो जियो के लिए ऑफ-नेट वॉयस ट्रैफ़िक सतुंलन ठीक रहेगा. पर अन्य ऑपरेटरों द्वारा अपने 2 जी वॉयस टैरिफ को ऊंचा रखकर असंतुलित बनाया जा रहा है. मोबाइल ट्रैफिक विषमता का हवाला देते हुए हाल ही में ट्राई ने परामर्श पत्र जारी कर इंटरकनेक्ट यूसेज चार्ज पर बंद अध्याय को फिर से खोल दिया है. जिसे इंटरकनेक्ट यूसेज चार्ज रेगुलेशन में संशोधन करके 1 जनवरी 2020 से शून्य बना दिया जाना था. 2017 में इंटरकनेक्ट यूसेज चार्ज रेगुलेशन में संशोधन काफी विचार-विमर्श और परामर्श के बाद किया गया था.

इस पृष्ठभूमि में परामर्श पत्र ने अनिश्चितता पैदा कर दी है और जियो को मजबूर कर दिया है कि अपनी अनिच्छा के बावजूद वह सभी ऑफ-नेट मोबाइल वॉयस कॉल के लिए 6 पैसे प्रति मिनट के इस नियामक शुल्क को वसूले खासकर तब तक जब तक इंटरकनेक्ट यूसेज चार्ज शुल्क मौजूद हैं. इसलिए, आज से जियो ग्राहकों द्वारा किए गए सभी रीचार्ज पर, अन्य मोबाइल ऑपरेटरों को किए गए कॉल पर इंटरकनेक्ट यूसेज चार्ज टॉप-अप वाउचर के माध्यम से 6 पैसा प्रति मिनट की मौजूदा इंटरकनेक्ट यूसेज चार्ज दर से चार्ज लिया जाएगा, जब तक कि ट्राई जीरो टर्मिनेशन चार्ज व्यवस्था लागू नही करती. वर्तमान में यह तारीख 1 जनवरी 2020 है.

जियो फिर से अपने 35 करोड़ ग्राहकों को आश्वस्त करता है कि आउटगोइंग ऑफ-नेट मोबाइल कॉल पर 6 पैसा प्रति मिनट का शुल्क केवल तब तक जारी रहेगा जब तक ट्राई अपने वर्तमान रेगुलेशन के अनुरूप इंटरकनेक्ट यूसेज चार्ज को समाप्त नहीं कर देता. हम ट्राई के साथ सभी डेटा को साझा करेंगे ताकि वह समझ सके कि शून्य इंटरकनेक्ट यूसेज चार्ज उपभोक्ताओं के सर्वोत्तम हित में है. और भारी संख्या में मिस्ड कॉल ने कैसे असंतुलन पैदा किया है.

हमें उम्मीद है कि इंटरकनेक्ट यूसेज चार्ज शुल्क वर्तमान रेगुलेशन के अनुसार खत्म हो जाएगा और यह अस्थायी शुल्क 31 दिसंबर 2019 तक पूरी तरह समाप्त हो जाएगा इसके बाद उपभोक्ताओं को इस शुल्क का भुगतान नहीं करना पड़ेगा. इस बीच, उपभोक्ता इंटरकनेक्ट यूसेज चार्ज टॉप-अप वाउचर के बदले अतिरिक्त डेटा एंटाइटेलमेंट का आनंद लेना जारी रख सकते हैं ताकि 31 दिसंबर 2019 तक प्रभावी टैरिफ वृद्धि न हो.





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