नवरात्र के नौवें दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा का विधि-विधान है. इस दिन को नवमी तिथि भी कहा जाता है. देवी का यह स्वरूप सभी प्रकार की सिद्धियां प्रदान करने वाला है.

ऐसा है मां सिद्धिदात्री का स्वरूप

मां सिद्धिदात्री की चार भुजाएं हैं, जिसमें एक में चक्र, दूसरे में गदा, तीसरे में कमल का पूल और चौथे में शंख है. सिद्धिदात्री कमल के पुष्प पर विराजमान हैं और इनका वाहन सिंह भी है. मान्यता है कि देवी के इस स्वरूप की साधना से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

ये है पूजन विधि

मां सिद्धिदात्री का चित्र या प्रतिमा स्थापित कर फल, फूल अर्पित करना चाहिए. सबसे पहले कलश की पूजा करें. फिर सभी देवी-देवताओं का ध्यान करें.

सिद्धगन्‍धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि,

सेव्यमाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी.

इस मंत्र का जाप करने के बाद 9 कन्याओं को घर में भोग लगाएं.

पूजा का शुभ मुहूर्त

इस बार नवमी सोमवार के दिन पड़ रही है. सुबह 10:24 बजे पूजा का शुभ मुहूर्त शुरू होकर दोपहर में 12 बजकर 38 मिनट पर खत्म हो जाएगा.

नवरात्र का अंतिम दिन यानि नवमी को बेहद शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन देवी की मन से पूजा करने पर कृपा बरसती है. सुख, समृद्धि और सफलता प्राप्त होती है.





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