देहरादून : कानून और कानून में सजा भी सबके लिए बराबर है. अपराधी चाहे कोई भी हो और किसी ने भी किया हो सबके लिए कानून में बराबर सजा का प्रावधान है. ऐसा ही है यातायात नियमों के साथ. चाहे कोई भी हो अगर यातायात के नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है तो उसे एक्ट के अनुसार जुर्माना भरना पड़ता है या पुलिस और आरटीओ द्वारा कार्रवाही की जाती है.

आरटीआई के तहत खुलासा, सीएम की गाड़ी का नहीं इंश्योरेंस

न्यू एक्ट लागू होने के बाद आम जनता से भारी भरकम जुर्माना वसूला गया लेकिन बड़ी खबर उत्तराखंड के सीएम और मुख्य सचिव से जुड़ी सामने आ रही है. जी हां एक आरटीआई के तहत खुलासा हुआ है कि सीएम त्रिवेंद्र रावत और मुख्य सचिव उत्पल कुमार जिस वाहन में सवार होते हैं उसका इंशोयरेंस ही नहीं है ऐसे में राजस्व संपत्ति विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है. कि आखिर सीएम और सचिव जैसे जिम्मेदार लोग जिनपर पूरा राज्य की जिम्मेदारी है औऱ राज्य को चला रहे हैं उनके प्रति इतनी बड़ी लापरवाही कैसे राज्य सम्पत्ति विभाग कर सकता है?

राज्य संपत्ति विभाग उड़ा रहा नियमों की धज्जियां

आपको बता दें कि राज्य संपत्ति विभाग ही मुख्य सचिव, सीएम और राज्यपाल समेत कइयों गाड़ियां मुहैया कराता है। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि अगर वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाएं तो फिर किसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी. आम जनता से पुलिस और आरटीओ नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना वसूलती है लेकिन राज्य संपत्ति विभाग द्वारा उड़ाई जा रही नियमों की धज्जियां पर विभाग पर कार्रवाही कौन करेगा ये अपने आप में बड़ा सवाल है?

सीएम और मुख्य सचिव के वाहन का चालान कौन, कैसे और कब करेगा?

ऐसे में सवाल बस एक ही खड़ा हो रहा है कि आखिर अब राजस्व संंपत्ति विभाग की इस गलती पर सीएम और मुख्य सचिव के वाहन का चालान कौन, कैसे और कब करेगा? अगर नियम सबके लिए बराबर है. कोई छोटा नहीं कोई बड़ा नहीं तो देखना होगा की आखिर सीएम और सचिव के वाहन का चालान कौन, कब, कैसे और कहां किया जाता है?





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