देहरादून :  चार धाम श्राइन बोर्ड बनाने के सरकार के फैसले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. चारों धाम के तीर्थ पुरोहितों ने सरकार के इस निर्णय के खिलाफ सड़कों पर उतरने का ऐलान कर दिया है. तीर्थ पुरोहितों ने सरकार के इस निर्णय को काला कानून करार दिया है. एक सूत्रीय मांग को लेकर तीर्थ पुरोहित तीन दिसंबर को मुख्यमंत्री आवास कूच करेंगे।

तीर्थ पुरोहितों के हितों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जायेगा-सीएम

इस पर सीएम ने शुक्रवार को बैठक के दौरान कहा कि जब हम कोई भी सुधार करते हैं तो उसकी प्रतिक्रिया होती ही है।सीएम ने कहा कि इस सम्बन्ध में तीर्थ पुरोहितों के हितों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि केदारनाथ पुनर्निमाण कार्यों का भी प्रारंभ में विरोध हुआ था। उन्होंने कहा प्रदेश के चार धाम सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर देश-विदेश से हिन्दु श्रद्धालु आना चाहते हैं, हमें अच्छे आतिथ्य के रूप में जाना जाता है। देश-विदेश के श्रद्धालुओं को उत्तराखण्ड के धार्मिक स्थलों पर आने का मौका मिले और उन्हें अच्छी सुविधाएं उपलब्ध हों इसके लिए कैबिनेट द्वारा श्राइन बोर्ड के गठन को मंजूरी दी गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2030 तक 01 करोड़ से अधिक श्रद्धालु यहां आयेंगे, इसी के दृष्टिगत धार्मिक स्थलों पर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जानी होंगी। उन्होंने कहा कि पंडा समाज के हक-हकूकों का भी पूरा ध्यान रखा जायेगा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में किसी को भी आशंकित होने की आवश्यकता नहीं है। इसके तहत भावी पीढ़ी की सुविधाओं को भी संरक्षित रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में आने वाले श्रद्धालुओं के साथ ही हमें सब की चिंता है, इसी के दृष्टिगत श्राइन बोर्ड का अध्यक्ष मुख्यमंत्री तथा मुख्य कार्यकारी अधिकारी की जिम्मेदारी अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी को सौंपी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बदरीनाथ का भी मास्टर प्लान के तहत विकास किया जायेगा।





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