वॉशिंगटन….. अमेरिकी कांग्रेस की हालिया रिपोर्ट में जानकारी दी गई है कि पाकिस्‍तान के सुरक्षा संस्‍था भारत की तरफ से हाल के दिनों में की गई रणनीतिक घेराबंदी से डरे हुए हैं. इसके साथ ही रिपोर्ट में जोर देकर कहा गया है कि अफगानिस्‍तान, के लिए पाकिस्‍तान एक अहम पड़ोसी है लेकिन पाक यहां पर एक कमजोर सरकार देखना चाहता है.

कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (सीआरएस) की तरफ से आई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्‍तान ने अफगानिस्‍तान में एक सक्रिय रोल अदा किया है लेकिन कई दशकों तक यहां पर उसने नकारात्‍मक प्रभाव डाला है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अफगानिस्‍तान में अस्थिरता की वजह से पाकिस्‍तान का काफी नुकसान होगा.पाकिस्‍तान को अपनी सरजमीं पर मौजूद इस्‍लामिक आतंकवाद से लड़ना पड़ रहा है. इसके अलावा यहां मौजूद अफगान शरणार्थियों की वजह से भी हालात मुश्किल हो गए हैं. सीआरएस की रिपोर्ट में कहा गया, ‘पाकिस्‍तान के सुरक्षा संस्‍थान इस समय भारत की तरफ से की गई रणनीतिक घेराबंदी से खासे डरे हुए हैं.

इस वजह से कहीं न कहीं वह अफगान तालिबान को दोस्‍त के तौर पर देखते हैं और न सिर्फ अफगान तालिबान बल्कि यहां पर मौजूद हर भारत-विरोधी तत्‍व उनका दोस्‍त है.’ रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की कूटनीतिक और व्‍यावसायिक मौजूदगी के अलावा अमेरिका की तरफ से इसे मिलने वाला समर्थन भी पाक के डर को बढ़ा रहा है.

भारत के हित अफगानिस्‍तान में इसके पाकिस्‍तान के साथ सीमा विवाद से कहीं ज्‍यादा बड़े हैं. भारत की कोशिशें लगातार मध्‍य एशिया के इस देश के साथ एक मजबूत राजनीतिक संबंध स्‍था‍पित करने की तरफ हैं और यह नजर आता है. सीआरएस की तरफ से अफगानिस्‍तान पर आई यह नई रिपोर्ट है और इसमें कहा गया है कि साल 2019 में आतंकी संगठनों ने अपनी क्षमताओं के जरिए चुनौती पेश करने की कोशिश की है. अमेरिकी कांग्रेस ने रिपोर्ट में इस तरफ भी ध्‍यान दिलाया है कि तालिबान की तरफ से अफगान सरकार के साथ बातचीत करने से साफ इनकार कर दिया गया है.





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