देहरादून: राज्य स्थापना दिवस समारोह का दूसरा दिन सैनिकों के नाम रहा। मेरे सैनिक-मेरा अभिमान कार्यक्रम में वर्तमान सैन्य अधिकारियों के साथ ही रिटार्ड सैन्य अधिकारी भी शामिल है। इस कार्यक्रम के जरिए देश की रक्षा में उत्तराखंड के सैनिकों की भूमिका, वर्तमान और भविष्य पर चर्चा की गई। सैनिकों से जुड़ी योजनाओं को शुभारंभ किया गया।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि हमारे लिए सैनिक सदैव सर्वोपरी हैं। अगर हम सेना का सम्मान करते हैं तो अपने देश का सम्मान करते हैं। हमारे देश की सेना विशिष्ठ सेना है। जिस देश की सैन्य शक्ति मजबूत है, दुनिया उसे पूजती है। कहा कि बलि बकरी की दी जाती है, शेर की नहीं। शक्ति की हमेशा पूजा होती है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने को लेकर कहा कि अब वहां हालात सामान्य हो चुके हैं।

भारतीय सैन्य अकादमी के कमांडेंट एसके झा ने कहा कि उत्तराखंड देश को सबसे ज्यादा सैनिक देने वाला तीसरा राज्य है। अभी भी उत्तराखंड के जो जवान सेना में ट्रेनिंग ले रहे हैं वह बहुत बहादुर हैं और अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। पाचंवें धाम सैन्य धाम के साथ ही यह राज्य ज्ञान धाम और प्राण धाम भी है।

फ्टिनेंट जनरल (सेनि.) गंभीर सिंह नेगी ने कहा कि उत्तराखंड के लोग मेहनती, वीर और कर्तव्यनिष्ठा से भरपूर हैं। गढ़वाल और कुमाऊं रेजीमेंट के जवानों ने हर युद्ध में अपना योगदान दिया है। चीन, पाकिस्तान और कारगिल युद्ध में डट कर सामना किया। कई शहीद भी हुए, जिनका नाम स्वर्णित अक्षरों में लिखा है। पहला विक्टोरिया क्रांस भी उत्तराखंड के वीर को ही मिला था। उन्होंने राइफलमैन जसवंत सिंह की वीरता का भी जिक्र किया।





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