देहरादून: कल यानि 14 फरवरी। पिछले साल 14 का यही दिन देश के काला दिन साबित हुआ था। पुलवामा में आतंकी हमले में सीआररपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। चारों तरह जवानों के शवों के चीथड़े पड़े थे। सड़क खून से सनी थी। म्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर हमलावर ने विस्फोटक भरी कार से सीआरपीएफ काफिले की बस को टक्कर मार दी। धमाका इतना भयंकर था कि बस के परखच्चे उड़ गए। इसके बाद घात लगाए आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग भी की। हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी।

इस आतंकी हमले में पूरा भारत आहत हुआ था। देश के हर राज्य से जवान शहीद हुए थे। ऐसा जख्म जिसे भूल पाना सायद भी किसी के लिए संभव हो। इस आतंकी हमले में उत्तराखंड के दो जवान लाल भी शहीद हुआ था। उत्तरकाशी में मोहन लाल ने भी शहीद हो गए थे। खटीमा के वीरेंद्र राणा ने भी सहादत दी थी. देश पर कुर्बान होने वाले इन जवानों की कल यानि 14 फरवरी को पहली बरसी है। देश अपने इन जवानों को पिछले एक साल में एक पल भी नहीं भूला। देश के लोग जानते हैं कि इन्हीं कुर्बानियों के कारण हम अपने घरों में सुरक्षित हैं।





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