रुड़की : कानून सबके लिए बराबर है और अपराध करने पर सजा भी सबके लिए बराबर है। कानून सजा पद और पैसा देखकर नहीं बल्कि अपराध देखकर देता है। वहीं रुड़की में इसी नियम कानून की खुलकर बीच सड़क में धज्जियां उड़ाई गई।

हाथों में नंगी तलवार लिए निकले कार्यकर्ता

जी हां शिक्षा की नगरी में अराजकता का माहौल पैदा करती एक ऐसी रैली जिसमे नियम, कानून ताख पर रख दिए गए और अपना इक़बाल बुलन्द किया गया। दरअसल हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने वैलेंटाइन-ड़े के विरोध में एक रैली निकाली जिसमे हाथों में लाठी डंडों के साथ साथ नग्गी तलवारें भी लहराई गयी। शहर के बीच से बाइकों पर सवार कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारों के साथ अपना-अपना इक़बाल बुलन्द करने का प्रयास भी किया। इस रैली को देखने वाले लोग एक पल के लिए सोचने पर मजबूर हो गए कि कानून की असल परिभाषा है क्या।

आम जनता और दलों के कार्यकर्ताओं के लिए नियम अलग-अलग क्यों?

आपको बता दें कि वैलेंटाइन-डे के विरोध में बजरंग दल के कार्यकर्ता आज सारे नियमों को ताक पर रख सड़कों पर उतरे. इस विरोध प्रदर्शन के बीच पुलिस प्रशासन पर कइ सवालिया निशान खड़े हुए। खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ाई गई लेकिन उन पर कोई एक्शन नहीं लिया गया। यूं तो चालान के नाम पर जनता से वसूली की जाती है लेकिन फिर आम जनता और इन दलों के कार्यकर्ताओं के लिए नियम अलग-अलग क्यों?





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