देश में कोरोना की दस्तक के बाद से लाॅकडाउन किया गया। कोरोना की रोकथाम के लिए महामारी एक्ट भी लागू हुआ। उसके बाद से पिछले तीन चरणों और जारी लाॅकडाउन के चौथे चरण में उल्लंघन करने वालों पर लगातार मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। इन मुकदमों में धारा-188 सभी पर लगाई जा रही है, लेकिन इसके बारे में कम ही लोग जानते हैं कि आखिर ये धारा क्यों लगाई जा रही है ? हम आपको बताएंगे कि धारा-188 में कितना जुर्माना और कितनी सजा हो सकती है ? इसके क्या-कया प्रावधान हैं ? किस कानून के तहत लगाई जा रही है ? उल्लंघन करने पर क्या कार्रवाई हो सकती है ?

इस ऐक्ट के तहत है धारा
कोरोना वयारस से लड़ने के लिए लॉकडाउन की घोषणा महामारी कानून 1897 के तहत लागू किया गया है। इसी कानून में प्रावधान किया गया है कि अगर लॉकडाउन में सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों का कोई व्यक्ति उल्लंघन करता है, तो उस पर भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

ये है आईपीसी 188
1897 के महामारी कानून के सेक्शन 3 में इस बात का जिक्र किया गया है कि अगर कोई प्रावधानों का उल्लंघन करता है, सरकार / कानून के निर्देशों / नियमों को तोड़ता है, तो उसे आईपीसी (IPC) की धारा 188 के तहत दंडित किया जा सकता है। इस संबंध में किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा दिए निर्देशों का उल्लंघन करने पर भी आपके खिलाफ ये धारा लगाई जा सकती है। अगर आपको सरकार द्वारा जारी उन निर्देशों की जानकारी है, फिर भी आप उनका उल्लंघन कर रहे हैं, तो भी आपके ऊपर धारा 188 के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

ये मिल सकती है सजा
IPC की धारा 188 के तहत सजा के दो प्रावधान हैं। पहला – अगर आप सरकार या किसी सरकारी अधिकारी द्वारा कानूनी रूप से दिए गए आदेशों का उल्लंघन करते हैं, या आपकी किसी हरकत से कानून व्यवस्था में लगे शख्स को नुकसान पहुंचता है, तो आपको कम से कम एक महीने की जेल या 200 रुपये जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है। वहीं दूसरा- अगर आपके द्वारा सरकार के आदेश का उल्लंघन किए जाने से मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा, आदि को खतरा होता है, तो आपको कम से कम 6 महीने की जेल या 1000 रुपये जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है।क्रिमिनल प्रोसीजर कोड के पहले शेड्यूल के अनुसार, दोनों ही स्थिति में जमानत मिल सकती है और कार्रवाई किसी भी मैजिस्ट्रेट द्वारा की जा सकती है।





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