अल्मोड़ा: कोरोना काल में डाॅक्टर दिन-रात अपनी जान दांव पर लगाकर दूसरों की जान बचा रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर ऐसा मामला भी सामने आया है, जिसने डाॅक्टरी पेशे को ही सवालों में खड़ा कर दिया। अल्मोड़ा अस्पताल में तैनात डाॅक्टर ने मरीज से उनकी शिकायत का बदला लिया। अल्मोड़ा जिला अस्पताल में भर्ती आयुष्मान कार्डधारक गरीब मरीज को बाजार की दवाइयां लिखने पर तीमारदार ने इसकी शिकायत सीएम पोर्टल पर कर दी।

शासन स्तर से जांच शुरू होने पर मरीज का इलाज कर रहे डॉ. पीएस टाकुली ने नाराज होकर सोमवार सुबह मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया। जबकि इस मरीज की हालत काफी नाजुक बनी हुई है। अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरसी पंत ने डॉ. टाकुली को लिखित रूप से चेतावनी दी है और भविष्य में सभी डॉक्टरों को बाहर की दवाएं नहीं लिखने के निर्देश दिए हैं। हवालबाग ब्लॉक के पाखुड़ा गांव निवासी रमेश सिंह लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार है। बीती नौ मई को उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉ. पीएस टाकुली रमेश का इलाज कर रहे थे।

मरीज के गुर्दे खराब होने के साथ ही उसे शुगर और सेफ्टीसीमिया आदि बीमारियां हैं। मरीज की आर्थिक स्थिति काफी खराब है। मरीज की देखरेख में जुटे परिजनों के साथ ही हीरा ढुंगरी निवासी सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र सिंह बिष्ट ने आरोप लगाया कि आयुष्मान कार्ड धारक होने के बावजूद डॉ. टाकुली बाजार की दवाएं लिख रहे थे। उन्होंने रविवार को मुख्यमंत्री पोर्टल में डॉ. टाकुली की शिकायत कर दी। शिकायत दर्ज होने के बाद रविवार रात को ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने पूछताछ शुरू कर दी। नाराज डॉ. टाकुली ने अस्पताल पहुंचते ही सबसे पहले गंभीर बीमार मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज कर बाहर बैठा दिया।

सीएमएस डाॅ. आरसी पंत का कहना है कि जिला अस्पताल में नौ मई से भर्ती किए रमेश सिंह की हालत काफी गंभीर थी। उन्हें डिस्चार्ज करने की जानकारी मिलने के बाद डॉ. पीएस टाकुली से जानकारी ली गई है और भविष्य में रोगियों के लिए बाजार की दवाएं नहीं लिखने के भी निर्देश दिए गए हैं। यदि रमेश सिंह के परिजन जिला अस्पताल में रमेश का इलाज कराना चाहते हैं तो उसे इलाज दिया जाएगा। पूर्व में बाजार से खरीदी गई दवाओं का भुगतान भी दिलाया जाएगा।





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