देहरादून : लॉकडाउन के दौरान कई दर्दनाक तस्वीरें हमने देखी। उन तस्वीरों ने कइयों के दिल को सहमा दिया। पैरों पर छाले, खाली पेटे, सिर में सामान और पैदल नन्हें बच्चे। ये तस्वीर देख हर किसी का दिल पसीजना लाजमी है लेकिन शायद सरकार का नहीं. इस लॉकडाउन में सरकार के दावे तब फेल होते दिखे जब सड़कों पर मजदूरों का हुजूम उमड़ा।

ऐसा ही नजारा हमारी टीम ने देखा पटेलनगर थाना क्षेत्र के पत्थरी बाग चौक पर…जहां 30 से 40 मजदूर सिर पर कट्टे लिए हरिद्वार से बिहार के लिए निकले। वो पुलिस कर्मियों के सामने से गुजरे लेकिन किसी ने उनसे ये तक नहीं पूछा की कहां से आए हो और कहां जाना है। फिर तभी हमारी टीम वहां से गुजर रही है थी और खबर उत्तराखंड की टीम ने उन्हें रोका और पूछा कहां जाना है तो मजदूर बोले बिहार और कहां से आए हो तो बताया हरिद्वार से।

मजदूरों ने किया अपना दर्द बयां 

हमने पूछा ऐसे कैसे जाआगे तो मजदूरों ने अपना दर्द बयां किया…रोते हुए मजदूर बोलेे कि वो हरिद्वार से आए हैं। वहां उनकी कोई मदद नहीं की गई और वो पैदल ही अपने घर को निकले। औऱ देहरादून पहुंचे। हमारी टीम द्वारा तुंरत डीजी अशोक कुमार को फोन किया गया और डीजी अशोक कुमार सर ने आश्वासन दिया कि मजदूरों को ट्रेन से घर भेजा जाएगाष बकायदा फोन का स्पीकर ऑन करके डीजी सर ने मजदूरों को समझाया और आश्वासन दिया कि आप लोगों को ट्रेन से घर पहुंचाया जाएगा चिंता न करें। फिर एसएसपी ऑफिस फोन कर इन मजदूरों की व्यवस्था कराने की अपील की गई।

एसएसपी ऑफिस से आश्वासन दिया गया कि मजदूरों को कोई दिक्कत नहीं होगी और सबको उनके घर पहुंचाया जाएगा। बता दें कि देहरादून से बिहार और मणिपुर के लिए ट्रेन शुरु हो चुकीं है। ऐसे में खबर उत्तराखंड की टीम ने मजदूरों की मदद करने की ठानी। और किसी भी हाल में घर पहुंचाना है चाहे एक दो दिन देरी से ही सही।

कारगी चौक से की गई बस की वाहन की व्यवस्था, होटल में किया रुकने का इंतजाम

मौके पर पटेलनगर कोतवाली के इंस्पेक्टर अपनी टीम के साथ पहुंचे और मजदूरों के लिए कारगी चौक से बस की व्यव्स्था कर आईएसबीटी स्थित एक होटल में ठहराया गया और खाने पीने की व्यवस्था की गई। साथ ही उनकी डीटेल ली गई। डीजी सर और एसएसपी सर ने आश्वासन दिया है कि मजदूरों को ट्रेन से घर पहुंचाया जाएगा। वहीं मजदूरों ने टीम से नंबर मांगा और मदद की मांग की। हमने भी आश्वासन दिया जब तक आप सरक्षित देहरादून में ट्रेन से गंतव्य के लिए रवाना नहीं किए जाते हम आपकी मदद करेंगे।

हरिद्वार शासन-प्रशासन पर खड़े होेत हैं सवाल

बड़ा सवाल ये है कि हरिद्वार से पैदल बिहार के लिए निकले मजदूरों पर क्या किसी पुलिस कर्मी या शासन के अधिकारी की नजर नहीं गई होगी। इतने किलोमीटर का सफर करने तक क्या किसी की नजर उन पर नहीं गई या सबने नजरें चुराई। लेकिन मीडिया कर्मियों की नजरों से नहीं बच सके। जो भी हरिद्वार शासन प्रशासन पर सवाल खड़ा होता है कि आखिर हरिद्वार से निकले मजदूरों पर कैसे पुलिसकर्मियों की नजर नहीं गई।

कई राज्यों से आई रुला देने वाली तस्वीर, ऐसा उत्तराखंड में नहीं होने की ठानी

हमारी शासन प्रशासन से गुजारिश है कि मजदूरों की मदद करें। चाहे एक दो दिन लेट ही सही लेकिन उनको सुरक्षित उनके घर पहुंचाए। ताकि वो भी उत्तराखंड सरकार और पुलिस को दुहाई दे। और राज्यों की तस्वीरे रुला देने वाली है और हम नहीं चाहते कि उत्तराखंड देवभूमि से कोई ऐसी तस्वीर राज्य का नाम खराब करे। इसलिए राज्य से दर्द किसी मजदूर को न हो औऱ ऐसी तस्वीरें उत्तराखंड की वायरल न हो उत्तराखंड ने मजदूरों की मदद करने की ठानी।

दीपिका रावत

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 





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