देहरादून : उत्तराखंड के इतिहास की दो ऐसी काली रातें, जिनके बारे सोचकर भी दिल घबरा जाता है। लोग सहम जाते हैं। उन दो काली रातों का डर ऐसा कि आज भी तेजी बारिश होते ही लोग डर जाते हैं। उनको वो काली रातें याद आने लगती हैं। लोग प्रार्थना करते हैं कि फिर कभी वो मनहूस रातें लौटकर ना आएं।

16/17 जून 2013। केदारनाथ में भीषण आपदा की ये तारीखें शासद ही किसी ने भूली होंगी या कोई उनको भुला पाया होगा। हालांकि, केदारघाटी अपने नये रूप में आ रही है, लेकिन उन दो काली रातों का डर और उस भयंकर तबाही के निशान आज भी केदारघाटी में हरे हैं। वो जख्म शायद ही कभी भर पाएं। केदारघाटी का नक्शा बदलने वाली उस भीषण आपदा से मची तबाही से लोग आज तक नहीं उभर पाए हैं।

केवल उत्तराखंड ही नहीं। केदारघाटी की भीषण आपदा भारत और दुनिया की भीषण आपदाओं में शामिल है। ऐसी आपदा जिसमें, हजारों लोगों ने जानें गवांई। हजारों लापता हो गए। लाखोें लागे प्रभावित हुए। देश का शायद ही कोई ऐसा राज्य होगा, जहां के लोग केदारघाटी की भीषण आपदा से प्रभावित ना हुए हैं। आपदा के वक्त देश और दुनियाभर के श्रद्धालु, कामगार और अन्य हजारों-हजार लोग केदारघाटी में मौजूद थे।





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