मोहम्मद यासीन 

रुद्रपुर : कोरोना काल में कही कहानियों और घटनाओं से लोगों का सामना हुआ। लोग एक-दूसरे की मदद के लिए भी सामने आए। लॉकडॉउन से लेकर अनलाॅक-1 तक में दो दोस्त दिन में अपनी कंपनी में ड्यूटी देते हैं और रात के अंधेरे में ये दोनों दोस्त अपने समाजसेवा के अभियान पर निकल जाते हैं। दिनभर काम करने के बाद रात को खाना बनाते हैं और फिर कोरोना वाॅरियर्स की मदद में जुट जाते हैं। वो लोगों को तो खाना खिलाते ही हैं, बेजुबानों को भी खाना खिलाते हैं।

जब कोरोना के कारण हर शख्स चारदीवारी में सिमट कर रह गया है। ऐसे वक्त में दो दोस्त ऐसे भी हं, जो कोरोना योद्धाओं के लिए हर रात जागकर काम करते रहे। मूलरूप से इंदौर के रहने वाले योगेश लांबा रुद्रपुर में सिडकुल की एक टेक्सटाइल कंपनी में काम करते हैं। लॉकडॉउन के दौरान योगेश ने लोगांे की सेवा का मन बनाया। इसमें उनके दोस्त राजकुमार भी योगेश के साथ शामिल हो गया। दोनों ने मिलकर जरूरतमंदो को खाना देने का काम शुरू कर दिया।

इसके बाद सिडकुल स्थित उनकी कंपनी में भी काम शुरू हो गया। अब योगेश दिन में कंपनी में काम करते हैं और रात में समाज सेवा में जुट जाते हैं। योगेश और राजकुमार रात को कोरोना वारियर्स को चाय, पानी और नाश्ता उपलब्ध करा रहे हैं। वो अपने खर्च से ही सभी चीजें जुटा रहे हैं। उनका कहना है कि लाॅकडाउन के शुरू में ही उन्हें एहसास हुआ कि देश के लिए अपनी जान दांव पर लगा देने वाले कोरोना वारियर्स को खाने-पीने की समस्या हो रही है।

शुरू में योगेश अकेले ही कोरोना वारियर्स को अपनी सेवाएं दे रहे थे। कुछ दिन बाद उनके दोस्त राजकुमार भी इस सेवा अभियान का हिस्सा बन गए। राजकुमार कहते हैं कि योगेश को अकेले ऐसा करते देख मैं खुद को रोक नहीं पाया। योगेश की इस पहल की सभी तारीफ कर रहे हैं। दोनों मिलकर रात को कोरोना काल में अपनी जान दांव पर लगाकर काम करने वालों की मदद करने में जुटे हैं। उनका अभियान अब भी जारी है।





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