हल्द्वानी : साइबर क्राइम लगातार बढ़ता जा रहा है। कई साइवर एक्सपर्ट अपने नाॅलेज का प्रयोग लोगों को लूटने के लिए करते हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे सभी हैं, जो अपने टैलेंट से दूसरों को लुटने से बचाते हैं। कुछ ऐसा ही काम हल्द्वानी के युवा साइबर एक्सपर्ट भी कर रहा है। अब तक नामी कंपनियों की वेबसाइट में बग ढूंढ कर लाखों कमा चुका है। हल्द्वानी के विकास बिष्ट गूगल और माइक्रोसॉफ्ट की वेबसाइट में बग ढूंढ कर रिवॉर्ड पा चुके हैं। विकास ने एक बार फिर से इंटरनेशनल मर्चेंडाइज कंपनी के सीसी पेमेंट गेटवे में बग ढूंढ निकाला है। बग रिपोर्ट करने पर वेबसाइट उन्हें अब तक 2000 से अधिक डॉलर का रिवॉर्ड दे चुकी है।

2000 डॉलर है रिवॉर्ड

इस बग की कैटेगरी पी-1 है, जिसमें वेबसाइट को सबसे अधिक नुकसान का खतरा होता है। कुसुमखेड़ा निवासी विकास सिंह बिष्ट ने बताया कि इंटरनेट पर कई वेबसाइट बग बाउंटी प्रोग्राम चलाती हैं, इसमें उनकी वेबसाइट में बग ढूंढने पर रिवॉर्ड करती हैं। उन्होंने बताया कि ऑटोमेशन टूल, इनफार्मेशन गैदरिंग, रिकोर टेक्निक और वेल्यूज मैथोलॉजी आदि की सहायता से बग डिटेक्ट किया जाता है। एक इंटरनेशनल मर्चेंडाइज कंपनी के पेमेंट गेटवे में बग मिला। इसके बारे में बग बाउंटी प्रोग्राम के तहत कंपनी को रिपोर्ट किया। इसके बाद वेबसाइट की साइबर टीम ने जांच करके रिवॉर्ड दिया है। रिवॉर्ड फिलहाल 2000 डॉलर है जो बढ़ सकता है।

पेमेंट पर सेंध

विकास ने बताया कि वेबसाइट में मौजूद बग के कारण उसमें कोई साइबर एक्सपर्ट ऑर्डर की पेमेंट कम करने के बाद भी वेबसाइट के सर्वर में उसे पूरा दिखा सकता था। इसमें पेमेंट गेटवे पर सेंध लगाई जाती थी जिससे कम पेमेंट करके ही किसी प्रोडक्ट आदि को खरीद सकते हैं। इसमें वेबसाइट को घाटे के बारे में एकाउंट स्टेटमेंट मैच करने पर ही नुकसान का पता चलता है। जिसके बाद फिर से पेमेंट करवाना आसान नहीं होता है।

ये होता है बग

कंप्यूटर प्रोग्राम, वेबसाइट और प्रोसेस में कोई गलती, त्रुटि या कमी को बग कहा जाता है। बग के कारण कंप्यूटर, वेबसाइट गलत परिणाम दे सकती है। बग प्रोग्राम, वेबसाइट के सोर्स कोड, डिजाइन आदि में किसी कमी के उत्पन्न होते हैं। सही समय पर इसे ठीक नहीं करने पर कई बार वेबसाइटों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है।





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