कई देशों ने कोरोना वैक्सीन बनाने का दावा किया लेकिन किसी को सफलता नहीं मिली और न ही कोरोना की कोई शत प्रतिशत दवा बनी। लेकिन मंगलवार को योगगुरु बाबा रामदेव ने कोरोना की दवा कोरोनिल को लॉन्च किया और 7 दिन के अंदर 100 प्रतिशत मरीज के ठीकहोने के दावा किया लेकिन झटका तब लगा जब आयुष मंत्रालय ने बाबा रामदेव की कोरोना दवा की प्रचार प्रसार पर रोक लगा दी और पतंजलि से कोरोनिल को लेकर पूरी जानकारी मांगी है.

दवाई को कोरोना से पीड़ित किसी गंभीर मरीज पर टेस्ट नहीं किया गया-रिपोर्ट

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अब जानकारी मिली है कि पतंजलि की इस दवाई को कोरोना से पीड़ित किसी गंभीर मरीज पर टेस्ट नहीं किया गया बल्कि सिर्फ उन लोगों पर टेस्ट किया गया है कि जिनमें कोरोना वायरस के काफी कम लक्षण थे. जी हां पतंजलि की ओर से आयुष मंत्रालय को जो पत्र दाखिल किया हया है उसमे ये कहा गया है।

इन मरीजों पर किया गया था टेस्ट

आज तक के न्यूज पोर्टल के अनुसार पतंजलि द्वारा दाखिल पेपर के अनुसार कोरोनिल का क्लीनिकल टेस्ट 120 ऐसे मरीजों पर किया गया है, जिनमें कोरोना वायरस के लक्षण काफी कम थे. इन मरीजों की उम्र 15 से 80 साल के बीच थी. कोरोना दवा को गंभीर कोरोना मरीजों पर नहीं टेस्ट किया गया था ऐसा खुलासा पतंजलि की ओर से आयुष मंत्रालय को जारी रिपोर्ट में कहा गया है।

69% रिकवरी शुरुआती 3 दिन और 100% रिकवरी 7 दिनों में किए जाने का दावा

पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन ट्रस्ट की ओर से मंत्रालय को बताया गया कि ये क्लीनिकल ट्रायल जयपुर के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च में किया गया था. दावा किया गया कि उन्होंने हर नियम का पालन किया है, साथ ही आयुर्वेदिक साइंस सेंट्रल काउंसिल के डीजी को लूप में रखा था. दावा किया गया कि दवा का पहला क्लीनिकल ट्रायल एक मरीज पर 29 मई को किया गया. इसमें 69 फीसदी रिकवरी शुरुआती तीन दिन और 100 फीसदी रिकवरी सात दिनों में किए जाने का दावा है. जल्द ही इसके पूरे रिजल्ट को जारी किया जाएगा.





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