जोशीमठ : मां अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए जी- जान लगा देती है। बहुत कम ही होते हैं जो की माता पिता के लिए स्वर्ण कुमार साबित हो पाते हैं। लेकिन उत्तराखंड की एक बहादुर बेटी ने साबित किया कि बेटियां लड़कों से कम बहादुर नहीं होती है और जब बात मां की हो तो मां के सामने कोई कुछ भी नहीं…मौत भी कुछ नही। बच्चा मां की ममता का कर्ज कभी नहीं चुका सकता लेकिन ये साबित कर सकता है कि वो मां-पिता को कितना मानता है और ये दिखाया उत्तरखंड की बहादुर बेटी किरण ने।

जी हां मामला रविवार का है। जहां रामकली देवी और उसकी 16 साल की बेटी किरण तपोवन में धौली गंगा किनारे लकड़ी बीनने गई थी। तभी अचनाक रामकली देवी का पैर फिसलने से वो नदीं में जा गिरी। मां को नदीं में बहता देख किरण घबराई नहीं बल्कि हिम्मत से काम लेते हुए किरण ने नदीं में छलांग लगा दी और कई देर तक संघर्ष करने के बाद मां को सुरक्षित बाहर ले आई।

प्रत्यक्षदर्शी ओम प्रकाश डोभाल के अनुसार किरण ने बहादुरी से अपनी मां की जान बचाई और खुद भी बहते-बहते बची लेकिन हिम्मत नहीं हारी। वह 20 मिनट तक मां को बचाने के लिए संघर्ष करती रही और मां को बचाने में उसने सफलता पाई। आज हर कोई बहादुर बेटी को शाबाशी दे रहा है।





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