श्रावण शुक्ल पंचमी को नागपंचमी पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस बार यह त्योहार 25 जुलाई, शनिवार के दिन मनाया जाएगा। सनातन परंपरा में पशुओं को भी पूजने की परंपरा है। नागों की पूजा का विशेष महत्व है. भगवान शिव तो उन्हें आभूषण की तरह गले में ही धारण करते हैं। नाग पंचमी का त्योहार इसलिए मनाया जाता है क्योंकि श्रावण महीने में जबरदस्त बारिश होती है, सांप अक्सर अपने बिल से बाहर आते हैं इसे रोकने के लिए नाग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है, इस दिन सांपों को दूध पिलाया जाता है।

सांपोंं को मारने वालों से नागिन बदला लेने के लिए किसी भी हद से गुजर जाती है

मान्यता है कि सांपोंं को मारने वालों से नागिन बदला लेने के लिए किसी भी हद से गुजर जाती है…इसलिए हमारे बुजुर्ग, महिलाएं क्षमा मांगने के लिए और उन्हें अपने परिवार को किसी भी नुकसान से बचाने के लिए सांप की मूर्तियों से प्रार्थना करती हैं और जीवित सांपों को दूध पिलाती हैं,। काल सर्प दोष, नाग नागिन की काली छाया ,घर में परिवार के लोगों को बार बार सांपों के दर्शन होना। इन सबका एक ही इलाज है की नाग पंचमी को नागों के मंदिर में दूध चढ़ाकर उनको नमन करने से सभी तरह के दोषों का हनन होता है। हरिद्वार में 400 वर्षों पुराना एक नाग देवता का प्रसिद्ध मंदिर है

 कुंडली में काल सर्प दोष से मिलता है छुटकारा

हरिद्वार में 400 वर्ष पुराना मन्दिर है जिसमे मान्यता है कि इस दिन नाग देवता की पूजा करने से उनकी कृपा मिलती और सर्प से किसी भी प्रकार की हानि का भय नहीं रहता।यहां पूजा करने से सभी की मनोकामना पूरी होती है। पुजारी रवि भानु का कहना है कि जिनकी कुंडली में काल सर्प दोष होता है। उन्हें इस दिन पूजन कराने से इस दोष से छुटकारा मिल जाता है, यह दोष तब लगता है। जब समस्त ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं, ऐसे व्यक्ति को जीवन के हर क्षेत्र में सफलता के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ता है। इसके अलावा राहु-केतु की वजह से यदि जीवन में कोई कठिनाई आ रही है, तो भी नाग पंचमी के दिन सांपों की पूजा करने के लिए कहा जाता है।

इसलिए मनाई जाती है नाग पंचमी

जियोतिष आचार्य पंडित गिरिधर शास्त्री ने बताया की भगवान शिव से जुडी ये सारी मान्यताएं है एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने सावन मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को कालिया नाग का वध किया था। इस तरह उन्होंने गोकुलवासियों की जान बचाई थी, इसके साथ ही समुद्र मंथन में जब रस्सी नहीं मिल रही थी, तो वासुकि नाग को रस्सी के रूप में प्रयोग किया गया था। देवताओं ने वासुकी नाग के कहने पर उनकी पूंछ पकड़ी थी और असुरों ने वासुकी नाग का मुंह। इस प्रकार समुद्र मंथन से पहले हलाहल विष निकला, जिसे भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण कर समस्त लोकों को रक्षा की और नीलकंठ कहलाये। इसके बाद इस मंथन से अमृत निकला, जिसे देवताओं ने पीकर अमरत्व को प्राप्त किया। नागों का महत्व पौराणिक होने के कारण से भी नागपंचमी का त्यौहार मनाया जाता है।

किसी राज्य में एक किसान परिवार रहता था, किसान के दो पुत्र व एक पुत्री थी,एक दिन हल जोतते समय हल से नाग के तीन बच्चे कुचल कर मर गए, नागिन पहले तो विलाप करती रही फिर उसने अपनी संतान के हत्यारे से बदला लेने का संकल्प किया, रात्रि को अंधकार में नागिन ने किसान, उसकी पत्नी व दोनों लड़कों को डस लिया,अगले दिन प्रातः किसान की पुत्री को डसने के उद्देश्य से नागिन फिर चली तो किसान कन्या ने उसके सामने दूध का भरा कटोरा रख दिया, हाथ जोड़ क्षमा मांगने लगी,

नागिन ने प्रसन्न होकर उसके माता-पिता व दोनों भाइयों को पुनः जीवित कर दिया, उस दिन श्रावण शुक्ल पंचमी थी, तब से आज तक नागों के कोप से बचने के लिए इस दिन नागों की पूजा की जाती है,तब से महिलाएं घर पर ही दरवाजे की दिवार के पास नागो का चित्र बनाकर दूध चढ़ाती और इस तरह नाग पंचमी मनाती हैं। नाग पंचमी के दिन भगवान महादेव और पार्वती की विधि-विधान से पूजन करें, इसके साथ ही महादेव का रुद्राभिषेक करने के बाद नाग-नागिन की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर दूध, अक्षत, फूल, चंदन और मीठा अर्पित करें ,जिससे आपके जीवन में सर्प दोष नहीं आएगा।





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