उत्तराखंड बीजेपी ने कोरोना को या तो मजाक समझ लिया है या फिर सत्ता में होने का पूरा फाएदा उठाने की कोशिशों में लगी है। ऐसा इसलिए क्योंकि बीजेपी के उत्तराखंड प्रभारी श्याम जाजू सेल्फ क्वारनंटीन अवधि में एक शहर से दूसरे शहर घूम रहें हैं और बीजेपी उनका बचाव कर रही है।

सोमवार को श्याम जाजू की हरिद्वार के एक मंदिर में पूजा करते हुए तस्वीरें जारी हुईं। तस्वीरें सोशल मीडिया पर आने के बाद सवाल उठा कि क्या श्याम जाजू क्वारनंटीन के नियमों से ऊपर हैं जो उन्हें सेल्फ क्वारनंटीन अवधि में एक शहर से दूसरे शहर से घूमने फिरने की इजाजत प्रशासन ने दे रखी है?

दरअसल श्याम जाजू रविवार को दिल्ली से देहरादून पहुंचे। दिलचस्प ये है कि रविवार को बीजेपी दफ्तर में आयोजित कार्यक्रम में बीजेपी के नेताओं ने मीडिया को बताया कि श्याम जाजू कोरोना हाई लोड एरिया दिल्ली से आए हैं और सेल्फ क्वारनंटीन हैं। खुद सीएम त्रिवेंद्र ने लोगों को बताया कि श्याम जाजू सेल्फ क्वारनंटीन हैं।

रविवार बीता ही था कि सोमवार को श्याम जाजू क्वारनंटीन से निकल कर हरिद्वार में भक्ति में लीन दिखे। मंदिर में कई लोगों के साथ बैठकर पूजा करते हुए दिखे। इसके बाद जब विपक्ष सहित मीडिया ने सवाल पूछा तो बीजेपी ने अपना बयान जारी किया है। इस बयान में बताया गया है कि श्याम जाजू अपने निजी कार्यक्रम में हरिद्वार पहुंचे थे। भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ देवेंद्र भसीन ने बताया कि भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व प्रदेश उपाध्यक्ष श्री श्याम ज़ाजू दिल्ली से उत्तराखंड आने के बाद 12 जुलाई से सेल्फ़ क्वारंटीन में हैं। श्री ज़ाजू को उस दिन भाजपा प्रदेश कार्यालय पर आयोजित महत्वपूर्ण कार्यक्रम में भाग लेना था और उसके बाद उनके उत्तराखंड प्रवास में अन्य कार्यक्रम भी थे। लेकिन मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कोरोना काल में राज्य सरकार के नियमों का हवाला देते हुए उनसे क्वारंटीन में जाने का अनुरोध किया जिसे स्वीकार करते हुए वे सेल्फ़ क्वारंटीन में चले गए। दिलचस्प ये है कि बीजेपी ये भी मान रही है कि वो सेल्फ क्वारनंटीन हैं। अब ऐसे में सवाल ये उठता है कि श्याम जाजू अगर देहरादून में सेल्फ क्वारनंटीन हैं तो देहरादून में अपने घर से निकलकर वो कैसे हरिद्वार की सीमा में पहुंच गए और कैसे एक मंदिर में पूजा कार्यक्रम में शामिल हुए?

हरीश रावत हुए थे सेल्फ क्वारनंटीन

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत कोरोना काल में लंबी अवधि तक अपनी बेटी के दिल्ली स्थित आवास में फंसे रहे। इसके बाद जब वो देहरादून लौटे तो मसूरी डायवर्जन स्थित अपने घर में तय अवधि तक सेल्फ क्वारनंटीन रहे। इस दौरान उन्होंने किसी से मुलाकात नहीं की। वहीं कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने भी कोरोना वार्ड में जाने के बाद सेल्फ क्वारनंटीन के नियमों का पालन किया और अपने घर पर रहे। उस दौरान 14 दिनों की क्वारनंटीन अवधि होती थी।

 

कांग्रेसियों पर मुकदमा, भाजपाइयों को ग्रीन सिग्नल

इस पूरे मसले में स्थानीय पुलिस और प्रशासन की भी घोर लापरवाही सामने आ रही है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर कोरोना काल में प्रदर्शन करने पर प्रशासन ने मुकदमा दर्ज कराया। प्रशासन ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने सोशल डिस्टेंसिंग ने नियमों का पालन नहीं किया और अनुमति से अधिक कार्यकर्ताओं को प्रदर्शन में बुला लिया।

वहींं बीजेपी कार्यालय में रविवार को एक कार्यक्रम आयोजित कर रुड़की के निर्दलीय मेयर गौरव गोयल की पार्टी में वापसी कराई गई। इस कार्यक्रम में अनुमति कितने लोगों की थी और कितने लोग शरीक हुए ये फिलहाल पता नहीं लग पाया है लेकिन जिस तरह से कार्यकर्ताओं की भीड़ उमड़ी थी सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की धज्जियां उड़ाईं गईं थीं उससे साफ लगता है कि बीजेपी के कार्यकर्ता फिलहाल इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी नहीं सुनने वाले हैं। अब ऐसे में सवाल ये उठता है कि देहरादून का स्थानीय प्रशासन क्यों पूरे शहर की सेहत को खतरे में डालकर भाजपाइयों को खुले आम इस तरह से नियमों की अवहेलना करने की छूट दे रहा है?

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