हल्द्वानी : बेलगाम नौकरशाही को लेकर राज्य में बड़ी बहस छिड़ गई है। कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक की बैठक में विभागीय सचिवों के नहीं पहुंचने का मामला तूल पकड़ने लगा है। मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने नौकरशाहों का पक्ष लिया है। उन्होंने कहा कि घोड़ा अपने घुड़सवार को पहचानता है। उन्होंने कहा कि अगर घुड़सवार कमजोर हो तो घोड़ा उसका लात मार देता है।

प्रदेश सरकार के मंत्री और विधायक भले ही नौकरशाही को बेलगाम कह रहे हों, लेकिन नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने राज्य के नौकरशाहों का समर्थन किया है। इंदिरा हृदयेश का कहना है कि पुरानी कहावत है कि घोड़ा अपने घुड़सवार को पहचानता है, जब घुड़सवार ही कमजोर हो जाता है, तो घोड़ा अपने घुड़सवार को लात मारकर गिरा देता है। इस कहावत में नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने नौकरशाहों को घोड़ा और मंत्री-विधायकों को घुड़सवार बताया है।

उनका कहना है कि अफसरों पर बेवजह के इल्जाम लगाने से बेहतर है कि सरकार को अपनी कमियों के बारे में देखना चाहिए। जब राज्य के अंदर अधिकारी सरकार के विधायकों और मंत्रियों की नहीं सुन रहे हैं तो वह सरकार किस काम की। उन्होंने कहा कि मैं विपक्ष में रहकर भी मुख्य सचिव से लेकर जिले के अधिकारियों से काम करवा लेती हूं।

किच्छा विधायक राजेश शुक्ला के उधमसिंह नगर के डीएम नीरज खैरवाल के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए विशेषाधिकार हनन पत्र पर उनका कहना है कि किसी भी विधायक को सार्वजनिक तौर पर अपमानित किया जाना विशेषाधिकार हनन बनता है। इस मामले में विधायक के विशेषाधिकार हनन पत्र को पढ़ेंगी और उसके बाद ही कोई प्रतिक्रिया देंगी। उनका कहना है कि विशेषाधिकार हनन बड़ा मामला होता है। नौकरशाही को भी इसको हल्के में नहीं लेना चाहिए।





0 comments:

Post a Comment

See More

 
Top