हरिद्वार : कोरोना काल में निजी स्कूलों के लिए सरकार ने फीस के लिए दबाव नहीं बनाने का नियम बनाया है। केवल ऑनलाइन पढ़ाने वाले स्कूलों को ही ट्यूशन फीस लेने की अनुमति दी है। लेकिन, इसके बाद भी स्कूल लोगों पर फीस देने का दबाव बना रहे हैं। कई निजी स्कूल ट्यूशन फीस के अलावा अन्य फीस भी वसूल रहे हैं। इसको लेकर हरिद्वार जिला शिक्षाधिकारी ने एक कड़ा फैैसला लिया है। यह फैसला प्रदेशभर के निजी स्कूलों के लिए एक सबक हो सकता है। फीस वसूली की शिकायत पर हरिद्वार के मुख्य शिक्षा अधिकारी ने जिले के दो पब्लिक स्कूलों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। एक स्कूल की मान्यता समाप्त कर दी गई। इसके अलावा 15 स्कूलों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। नोटिस का जवाब न मिलने पर इन स्कूलों पर भी कार्रवाई की जायेगी।

कोरोनाकाल में बिगड़ती आर्थिक स्थिति को देखते हुए सरकार ने पब्लिक स्कूलों से केवल ट्यूशन फीस लेने को कहा था। उसमें भी नियम रखा गया कि फीस वसूली को लेकर किसी पर अनावश्यक दवाब न बनाया जाए। सरकार के आदेशों को दरकिनार कर पब्लिक स्कूलों ने अभिभावकों को मोबाइल पर एसएमएस भेजकर फीस जमा करने को लेकर दवाब बनाया। ऐेसे कई मामले सुर्खियों में भी रहे हैं।

हरिद्वार के मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय को कोरोना काल की अब तक की अवधि में फीस वसूले जाने के साथ ही निजी स्कूलों के शिक्षकों को वेतन न मिलने को लेकर 28 शिकायतें मिली। मुख्य शिक्षा अधिकारी डॉ. आनंद भारद्वाज ने बताया कि शिक्षकों की वेतन संबंधी शिकायत का निस्तारण कर दिया गया है। कुछ स्कूल प्रबंधन ने फीस वसूली न करने का आश्वासन लिखित में दिया है, जिन्होंने नोटिस के जवाब नहीं दिए ऐसे दो स्कूलों पर एक-एक लाख का जुर्माना लगाया गया है। एक स्कूल की मान्यता समाप्त की गई है।

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