देहरादून : उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सरकार शुरू से भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रूख रहा है। वहीं 3 सालों से ज्यादा समय में त्रिवेंद्र सरकार पर एक भी भ्रष्टाचार को आरोप नहीं लगा है। लेकिन जहां पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को लग रहा है कि कुछ गडबड हुई है. मुख्यमंत्री उन विभाग में ऑडिट के आदेश दिए जा रहे हैं। इसी के बीच उत्तराखंड में इन दिनों कांग्रेस शासन काल में हुए चावल घोटाले हो लेकर मामला सुर्खियों में आ गया हैं। कांग्रेस शासन काल में उत्तराखंड में हुए 600 करोड़ के चावल घोटाले की पुष्टि ऑडिट रिपार्ट में भी उजागर हुई। वित्त सचिव अमित नेगी के द्धारा 2015-16 और 2016-17 के दौरान हुए चावल घोटाले की ऑडिट रिपार्ट खाद्य विभाग को भेज दी गई। ऑडिट रिपार्ट में साफ हुआ है कि धान खरीद से लेकर मिलिंग, पैकिंग, गोदामों तक पहुंचाने के दौरान हर स्तर पर गड़बड़ी हुई है।

2017 में सामने आया था चावल घोटाला, एसआईटी ने की थी जांच

आपको बता दें कि 2017 में चावल घोटाला सामने आया था। इसकी जांच एसआईटी ने भी की थी और करीब 600 करोड़ रुपये के घोटाले का अनुमान जताया था। गरीब के कोटे के चावल में हेरा फेरी से लेकर अन्य कई मामले सामने आए थे। इसमें कुछ अधिकारियों को निलंबित भी किया गया था। लेकिन अब स्पेशल ऑडिट रिपोर्ट में भी हर स्तर पर गडबड़ झाला सामने आया है।नोटबंदी का भी इसमें फायदा लिया गया और बोरों तक में करोड़ों के रुपये बनाए गए। रिपोर्ट के मुताबिक खाद्य सुरक्षा में ही सरकार को इससे करीब 18 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। बोरों की प्रतिपूर्ति में ही 43 करोड़ रुपये का अधिक भुगतान दिखाया गया।

सीएम बोले- हमारी सरकार ने पकड़ा घोटाला

बताया जा रहा है कि स्पेशल ऑडिट टीम ने घोटाले से जुड़े सभी पक्षों की ओर से पूरी तरह सहयोग न मिलने की बात भी कहीं है। कांग्रेस शासन काल में हुए 600 करोड़ रूपये के चावल घोटाले पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है कि हमारी सरकार बनते ही हमने इस घोटाले को पकड़ा था। क्योंकि हमारी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करती आई है। सरकार के इस कदम से आज गरीबों को अच्छा चावल भी मिल रहा है।





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