एयर इंडिया एक्सप्रेस विमान हादसे में कई यात्रियों की जान बचाकर खुद अपनी जान गंवाने वाले दीपक साठे की मौत से परिवार में मातम पसरा है। दीपक साठे की मां ने बताया कि बेटे ने कहा था कि मां बाहर कोरोना का कहर है तो ऐसे में बाहर मत जाना आप दोनों को कुछ हो गया तो वो टूट जाएगा लेकिन किसमत देखिए खुद उनकी मौत की खबर बूढ़े मां-पिता को मिली। बूढ़े माता पिता सदमे में है। बता दें कि जो विमान हादसे का शिकार हुआ उसमे 190 यात्री थे जिन्हें पायलट कैप्टन दीपक वसंत साठे ला रहे थे क्योंकि वो वो लोग थे जो की लॉकडाउन के कारण फंसे हुए थे।

पहले बड़ा बेटा खोया और अब दूसरा बेटा भी-मां

कैप्टन साठे बहुत ही बहादुर और अनुभवी पायलट थे। उनकी मां ने बताया कि उनके बेटे दीपक को ‘स्‍वॉर्ड ऑफ ऑनर’ सम्‍मानित किया गया था। गुजरात बाढ़ के दौरान उन्‍होंने एक सैनिक के बच्‍चे को अपने कंधे पर बिठाकर सुरक्षित जगह पहुंचाया था। उनकी मां ने अपने सबसे बड़े बेटे विकास साठे को भी याद करते हुए बताया कि उनका बड़ा बेटा सेना में लेफ्टिनेंट था जो देश के लिए शहीद हो गया और अब छोटे बेटे को भी खो दिया।

दीपक साठे के पिता सेना में ब्रिगेडियर थे

जानकारी मिली है कि दीपक साठे के पिता सेना में ब्रिगेडियर थे। उनका पहला बेटा कारगिल युद्ध में शहीद हुआ था। उन्होंने पहले बड़ाबेटा खोया और अब अपना दूसरा बेटा भी खोया है। दीपक देश के उन चुनिंदा पायलटों में से एक थे, जिन्होंने एयर इंडिया के एयरबस 310 विमान और बोइंग 737 को उड़ाया था। कैप्टन दीपक साठे और उनके को-पायलट कैप्टन अखिलेश कुमार ने विमान को बचाने की बहुत कोशिश की। उन्होंने अंतिम सांस तक विमान को रोकने की कोशिश की, लेकिन विमान हादसे का शिकार हो गया।

मां को सरप्राइज देना चाहते थे साठे

बता दें कि शनिवार को साठे की मां का जन्मदिन था। उनके रिश्तेदारों ने बताया कि दीपक अपनी मां को सरप्राइज देना चाहते थे लेकिन उससे पहले वो हादसे का शिकार हो गए औऱ उनकी मौत की खबर घर पहुंची। उनके रिश्तेदार ने बताया कि मां द्वारा 84वां जन्मदिन मनाने से पहले ही शुक्रवार को 58 वर्षीय साठे की विमान दुर्घटना में मौत हो गई।

बता दें कि कैप्टन साठे और अखिलेश दोनों की गिनती देश के बेहतरीन पायलटों में की जाती थी। कैप्टन दीपक साठे का परिवार परिवार मुंबई के पवई में रहता है। उन्हें जून 1981 में सेना में नियुक्ती मिली थी और जून 2003 में यानी 22 वर्षों के बाद सेवानिवृत्त हुए थे। इस दौरान जून 1992 में स्क्वाड्रन लीडर से भी सम्मानित किया गया। सेना से रिटायर के बाद वह एयर इंडिया के पैसेंजर्स फ्लाइट उड़ाने लगे। कैप्टन साठे को नेशनल डिफेंस एकेडमी के 58वीं कोर्स में गोल्ड मेडल मिला था। इसके बाद उन्होंने एयरफोर्स एकेडमी ज्वाइन की। यहां 127वें पायलट कोर्स में उन्होंने टॉप किया और इसके लिए उन्हें सोर्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया गया। साठे एयर इंडिया एक्सप्रेस की बोइंग 737 फ्लाइट उड़ाने से पहले एयरबस 310 भी उड़ा चुके हैं। हिंदुस्तान एयरोनॉटिकल के वह टेस्ट पायलट भी रहे।





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