देहरादून : निशानेबाज और भारतीय जूनियर पिस्टल टीम के मुख्य कोच देवभूमि के जसपाल राणा को आलंपिक कोटा हासल करने और उनके शिष्य मनु भाकर की सफलता के लिए उनको द्रोणाचार्य अवार्ड से नवाजा जाएगा। उनको नाम पिछली बार भी इस पुरस्कार के लिए गया था, लेकिन उनको पुरस्कार नहीं दिया गया। तब इस मामले को लेकर विवाद भी हुआ था। इस बार उनके नाम की अनुशंसा की गयी है।

जसपाल राणा ने 1995 के कॉमनवेल्थ गेम्स की शूटिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करने वाले गोल्डन बॉय जसपाल राणा को शूटिंग उनके पिता नारायण सिंह राणा ने सिखाई। उनकी बेटी देवांशी राणा भी नेशनल स्थर पर पदक हासिल कर चुकी हैं। 1995 में इटली के मिलान शहर में आयोजित हुए कॉमनवेल्थ गेम्स की शूटिंग स्पर्धा में आठ गोल्ड जीतकर उन्होंने नया रिकॉर्ड बनाया था।

1994 में उनको अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा यश भारती पुरस्कार (1994), राजधानी रत्न पुरस्कार, इंदिरा गांधी प्रियदर्शिनी पुरस्कार आदि राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वे कई अवाॅर्ड जीत चुके हैं। लंबे समय तक राष्ट्रीय शूटिंग परिदृश्य से दूर रहे जसपाल राणा ने देहरादून में भी शूटर तैयार किए। पौंधा में उनकी जसपाल राणा शूटिंग एकेडमी भी है। जहां युवा निशानेबाजों को तैयार कर रहे हैं। अर्जुन पुरस्कार 1994,





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