देहरादून : जैसे ही गुलमर्ग में लापता सैनिक देहरादून अंबीवाला निवासी सेना के जवान हवलदार राजेंद्र नेगी का पार्थिव शरीर उनके आवाज पर लाया गया, पति को ताबूत में देख पत्नी की चीख निकल गई।लोगों ने बेमुश्किल उन्हें संभाला। मां अपने लाडले को तिरंगे में लिपटा देख बेसुध हो गई। जब बेटा सेना में भर्ती हुआ था उस वक्त जितनी खुशी थी, आज उससे उलट उससे भी ज्यादा गम है। एक मां ने अपने बेटे को खो दिया जिसके तीन छोेटे छोटे बच्चे हैं। पिता ने हिम्मत रखी और सरकार समेत सेना का आभार जताया कि 8 महीने बाद उनका बेटा तो नहीं लौटा लेकिन उसका पार्थिव शरीर सेना ने ढूंढकर उनको सौंपा। वहीं सीएम ने शहीद के आवास में जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की और शहीद की पत्नी को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया। पिता सीएम के सामने हाथ जोड़ते नजर आए।

आपको बता दें कि हवलदार राजेंद्र नेगी 8 जनवरी को जम्मू कश्मीर के गुलमर्ग से ड्यूटी के दौरान लापता हुए थे। वो हिमस्खलन की चपेट में आने से लापता हो गए थे। वहीं इसके बाद सेना द्वारा सर्च ऑपरेशन चलाया गया लेकिन जवान का कुछ पता नहीं चल पाया। जिसके बाद 21 मई को सेना ने उन्हें बैटल कैजुल्टी मानते हुए शहीद घोषित कर दिया था लेकिन परिवार वाले राजेंद्र नेगी को शहीद मानने को तैयार नहीं थे। वह राजेंद्र नेगी का पार्थिव शरीर लानेे की मांग कर रहे थे। तो वहीं 15 अगस्त के दिन राजेन्द्र नेगी का पार्थिव शरीर  सेना को बरामद हुआ। 8 महीने तक बर्फ में ही राजेन्द्र नेगी का पार्थिव शरीर रहा जो 15 अगस्त को सेना को मिला।





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