देहरादून : राजनीति में आरोप लगाने के लिए नेता आतुर रहते हैं। ऐसे ही आरोप पिछले दिनों कोरोना राहत कोष में विधायकों के 30 प्रतिशत वेतन देने को लेकर भी लग रहे थे। भाजपा प्रवक्ता मुन्ना सिंह चैहान ने कांग्रेस पर आरोप लगाया था कि कांग्रेस के विधायकों ने वेतन नहीं कटवाया, लेकिन अब इसका आरटीआई में बड़ा खुलासा हुआ है। ऐसा खुलासा, जिससे कांग्रेस भाजपा पर पलटवार करने को कोई मौका नहीं छोड़ना चाहती।

दरअसल, भाजपा के अधिकांश विधायकों ने कोरोना राहत कोष में मूल वेतन कटवाकर प्रदेश सरकार की अपील को गंभीरता से नहीं लिया। वहीं, कांग्रेस विधायकों ने मूल वेतन के साथ ही भत्तों में भी कटौती कराई, जिसका खुलासा कांग्रेस विधायक की आरटीआई में हुआ है। कांग्रेस के केदारनाथ विधायक मनोज रावत को आरटीआई के तहत विधानसभा ने जो जानकारी दी उससे जाहिर हो रहा है कि सत्ता पक्ष के अधिकतर विधायकों ने सीएम राहत कोष से दूरी बनाकर रखी है।

मंत्रियों को हटा दिया जाए तो एक अतिरिक्त विधायक सहित 62 में से 42 विधायकों ने ही सीएम राहत कोष में वेतन दिया। जिसमें सत्ता पक्ष के बीस विधायक हैं जिन्होंने पैसे नहीं दिए। सीएम राहत कोष में पैसे देने वाले विधायकों में नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश टॉप पर हैं। उन्होंने राहत कोष में वेतन के साथ ही निर्वाचन क्षेत्र भत्ता और सचिव भत्ते का तीस प्रतिशत दिया। इस तरह उनके वेतन से 75600 रुपये दो बार राहत कोष में जमा हुए। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने भी नेता प्रतिपक्ष का अनुसरण किया।

उनके वेतन से 57600 रुपये कटे। एक को छोड़कर बाकी सभी कांग्रेस विधायकों के वेतन से इतने ही पैसे कटे। सूची में ऐसे कुल 21 विधायक हैं। बाकी में से किसी ने मूल वेतन 30 हजार तो किसी ने मूल वेतन का तीस प्रतिशत देकर काम चलाया। केदारनाथ विधायक मनोज रावत ने बताया कि सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत विधानसभा से यह जानकारी मिली। सबसे ज्यादा हल्ला मचाने वाले मुन्ना सिंह चैहान का सहयोग ही कम नजर आ रहा है। प्रदेश सरकार क्या विपक्ष के विधायकों के बल पर ही राहत कोष को भरना चाह रही है।





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