देहरादून : 23 सितंबर को उत्तराखंड विधानसभा का एक दिवसीय सत्र आहुत किया जाएगा। सत्र के लिए पहले तीन दिन का समय निर्धारित था। विपक्ष 3 दिन के समय को भी कम मान रहा था। लेकिन, अब सत्र ही एक दिन का होगा। उसमें भी बड़ी बात यह है कि प्रश्नकाल नहीं होगा। मतलब साफ है कि इस बार विधायकों ने जो भी सवाल पूछे हैं। उनका जवाब उनको मिलने वाला नहीं है।

जानकारी के अनुसार विधानसभा सत्र में विधायकों ने 1053 सवाल लगाए हैं। इन सवालों में विधायकों ने उनके क्षेत्रों में चल रही योजनाओं और राज्य के विकास से जुड़े प्रश्नों को शामिल किया रहता है। इससे सरकार का टेस्ट भी होता है और सच्चाई भी पता चलती है कि किस योजना पर क्या काम हुआ और किन योजनाओं पर अब तक काम ही नहीं हुआ। कुलमिलाकर प्रश्नकाल सत्र का सबसे अहम हिस्सा होता है। गत रविवार को हुई कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में तय किया गया किएक दिन के सत्र में प्रश्नकाल नहीं होगा।

सरकार भी प्रश्नकाल को लेकर तैयार नहीं थी। प्रश्नकाल टलने से सरकार भी खुश होगी। मंत्री भी खुश होंगे कि उनको जवाब नहीं देना पड़ेगा। सरकार को अब केवल प्रश्नकाल टल जाने के कारण सरकार को कुछ राहत मिली है। अब केवल नियम-58 की सूचना पर उसे विपक्षी विधायकों के सवालों का सामना करना पड़ेगा।

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