देहरादून : आज के समय में बेरोजगार युवा सरकारी नौकरी की तलाश में है। युवा कैसे भी सरकारी नौकरी पाना चाहता है औऱ कभी कभी इसकी चाह में इतना पागल हो जाता है कि गलत कदम उठा बैठता है। वहीं उत्तराखंड में सरकारी नौकरियों का टोटा है। युवा वैकेंसी निकलने का इंतजार कर रहा है। वहीं खबर है कि उत्तराखंड पुलिस विभाग में भर्तियां निकलने वाली है जिसको लेकर युवा तैयारी में जुट गए है। कई वर्दीधारी खाकी को अपनी शान भी समझते हैं और एक दम सिंघम स्टाइल में रहते हैं लेकिन काम का भार भी उतना ही ज्यादा होता है जिससे हालत पस्त हो जाती है। वहीं लोगों के विरोध का भी सामना करना पड़ता है। वहीं कभी कभी लोगों की गलती का खामियाजा भी पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों को भुगतना पड़ता है। निलंबन की गाज़ गिरती है। कई पुलिसकर्मी वर्तमान में भी ऐसे हैं जो दूसरी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं और पुलिस की नौकरी छोड़ने का प्लान कर रहे हैं।

एक पुलिसकर्मी 24 घंटे ड्यूटी पर होता है

रैलियां, वीआईपी ड्यूटी के साथ इंवेस्टीगेश, मर्डर केस, रेप केस, चोरी डकैती समेत कई तरह की जांचें पुलिसकर्मी को करनी पड़ती है जिससे वो कभी कभी बहुत थक जाता है या ऊब जाता है। न त्यौहार में कोई छुट्टी होती है बल्कि त्यौहार में ड्यूटी लगाई जाती है। वीआईपी ड्यूटी के लिए एक जिले से दूसरे जिले में जाना पड़ता है। 8-9 घंटे की ड्यूटी की जगह 24 घंटे ड्यूटी करनी होती है क्योंकि किसी भी केस से संबंधित फोन कभी भी आ जाता है जिस पर मौके पर जाना पड़ता है ऐेसे में एक पुलिसकर्मी 24 घंटे ड्यूटी पर होता है।

आरटीआई में हुआ खुलासा

वहीं खाकी से कई युवाओं का मोह भंग होता जा रहा है। जी हां इसका खुलासा एक आरटीआइ में हुआ है। आरटीआई के जवाब में पता चला है कि साल 2013 से 2019 के बीच 55 पुलिसकर्मियों ने नौकरी छोड़ी है औऱ वो दूसरी नौकर कर रहे हैं। नौकरी से त्यागपत्र में किसी ने तनाव और काम के बोझ को कारण नहीं बताया है, लेकिन जिन लोगों ने नौकरी छोड़ी उन्होंने इशारों ही इशारों में इसी तरह का जवाब दिया है।

देहरादून निवासी याचिकाकर्ता एस बर्थवाल ने मांगी सूचना

आपको बता दें कि देहरादून निवासी याचिकाकर्ता एस बर्थवाल ने उत्तराखंड पुलिस से जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी जिसमे खुलासा हुआ कि अब युवाओं का खाकी से मोह भंग होता जा रहा है। कई युवा ऐसे भी हैं जो नौकरी छोड़ने की चाह भी लिए हैं लेकिन कोई दूसरी नौकरी और परिवार की जिम्मेदारी समेत रोजी रोटी न होने कारण छोड़ नहीं पा रहे हैं।

सात सालों में इतने पुलिसकर्मियों ने छोड़ी नौकरी

आपको बता दे आरटीआई में खुलासा हुआ है बीते सात सालों में 55 पुलिस कर्मियों ने पुलिस की नौकरी छोड़ी है। अधिकतर पुलिसकर्मियों ने नौकरी छोड़ने का कारण पर्सनल समस्या या घर की समस्या बताई है। अधिकारी भी मानते हैं कि पुलिस की नौकरी आठ घंटे नही बल्कि 24 घंटे और सप्ताह के 7 दिन की होती है।

दारोगा से लेकर इंस्पेक्टर तक शामिल

आपको बता दें कि नौकरी छोड़ने वालों में सिर्फ सिपाही ही नहीं हैं बल्कि दारोगा से लेकर इंस्पेक्टर तक शामिल है जिन्होंने खाकी की नौकरी छोड़ी और अब कोई और नौकरी कर रहे हैं। बता दें कि सरकार द्वारा पुलिसकर्मियों को साल में 12 नहीं बल्कि 13 महीने का वेतन दिया जाता है क्योंकि पुलिस ने राज्य की सुरक्षा की बागडोर संभाल रखी है औऱ पुलिस कर्मी दिन रात ड्यूटी करते हैं।

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