वक़्त:तू ही शिक्षक ,तू ही समीक्षक समय से बड़ा शिक्षक कौन कभी हँसा के कभी रुला के कभी उठा के कभी गिरा के जीवन को सिखलाता कौन।। कौन असल है कौन नक़ल है अपना कौन पराया कौन वक़्त पलटते दिखला देता पर तू रहता है ख़ुद मौन।। जो पर्वत था अब रत्ती है तब शरीर […]



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