देहरादून : रमेश भट्ट ने दिवंगत हीरा सिंह राणा की जयंती पर एक पोस्ट लिखी है। साथ ही एक वीडियो गीत का ट्रेलर भी जारी किया है। उन्होनें लिखा है कि देवभूमि उत्तराखंड ने अनेक विभूतियों को जन्म दिया है। यह भूमि रत्नगर्भा है। उन्हीं में एक नाम है हीरा सिंह राणा जी का, जिन्हें हमने हाल में ही खोया है। भले ही उनका शरीर हमारे बीच में न हो, किंतु समाज को संदेश देते हुए उनके प्रेरक गीत सदैव अमर रहेंगे। हीरा सिंह राणा जी पर्वतीय सरोकारों के चिंतक थे, विचारक थे, आग्रही थे और हमारी सांस्कृतिक विरासत के पुरोधा थे।

उन्होंने श्रृंगार के गीत भी गाये तो संदेश दिया, ओज के गीत भी गाये तो संदेश दिया। राणा जी प्रेरणा पुंज थे। उत्तराखंड के हर बदलाव और हर आंदोलन की आवाज थे। उन्होंने शालीनता, गरिमा, सुंदर शब्दसंयोजन और प्रकृति को प्रतीक बनाकर अर्थपूर्ण गीत हमें दिये। उत्तराखण्ड की खूबसूरती को श्रृंगार रस में पिरोकर पेश करना उनकी सबसे अलग कला थी।

यूं कहूं कि राणा जी लोककला जगत के एक यूनिक पर्सनैलिटी थे। यूनिक को कुमाउँनी में अणकशी कहा जाता है, यानी जो सबसे अलग हो। मेरा सौभाग्य है मुझे राणा जी का सानिध्य मिला। निरंतर उनके साथ संवाद रहा। भाषा संस्कृति के प्रति उनका अनुराग देखा। पूरे जीवन उन्होंने निजी संसाधनों के लिए संघर्ष किया, किंतु किसी पुरस्कार के लिए लालायित नहीं रहे। एक छोटे से संस्कृति सेवक के रूप में मैंने भेंट स्वरूप उन्हें श्रद्धांजलि देने का प्रयास किया है।

यह अणकशी गीत एक छोटा सा प्रयास है कि उनकी तरह ही भाषाई मर्यादा, शब्दों की गरिमा और गीत का संदेश राणा जी के निकट पहुंचने का प्रयास करे। यह उनका सच्चा स्मरण होगा। मैं विगत डेढ़ साल से इस गीत पर काम कर रहा था। अब जाकर यह गीत बन पाया। आज राणा जी के जन्मदिन है। इस गीत का ट्रेलर आपके सामने है। मुझे लगता है यह उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। आप लोगों का मार्गदर्शन, सुझाव और प्रेरणा मुझे इस हेतु मुझे प्राप्त होगा।

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