सूरत : सूरत के कोसाड गांव के कोड़ीवाड़ मोहल्ले में रहने वाली 41 साल की ईला बेन नितिन भाई पटेल अब ताउम्र जिंदा रहेंगे। उनका शरीर भले ही जिंदा ना हो, लेकिन उनकी धड़कनें अब किसी और के शरीर में धड़कती रहेंगी। वो अपने घर में चक्कर आने पर गिर गई थीं। उन्हें इलाज के लिए शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डाॅक्टरों ने उनको ब्रेनडेड घोषित कर दिया।

सूरत की संस्था लोगों को अंगदान के लिए प्रोत्साहित करती रहती है। संस्था डोनेट लाइफ के समझाने के बाद परिवार अंगदान के लिए तैयार हो गया। महिला के अंगों की गहन जांच के बाद उनके शरीर के 7 अंगों का दान करने का फैसला लिया गया। इनमें 2 किडनी और दोनों आंखों के अलावा लीवर, फेफड़ा और हृदय (दिल) शामिल है।

महिला के दिल को सूरत से चेन्नई 1,610 किलोमीटर का सफर सिर्फ 180 मिनट तय कर 15 साल की छात्रा के शरीर में ट्रांसप्लांट किया गया। फेफड़ों का ट्रांसप्लांट मुंबई की 61 साल की महिला के शरीर में दिल्ली में किया गया। जबकि महिला के अन्य अंगों को अलग-अलग जरूरतमंद लोगों को देकर जीवनदान दिया गया।

खास बात यह है कि महिला के दिल को समय पर चेन्नई पहुंचाने के लिए ग्रीन काॅरिडोर बनाया गया था। गुजरात के सूरत की संस्था के जरिए अब तक 28 लोगों के हार्ट दान किया जा चुके हैं। अंगदान के लिए डोनेट लाइफ के अध्यक्ष नीलेश माडलेवाला से संपर्क किया गया था, जिसके बाद उन्होंने सर्च शुरू किया और इंत में उनको सफलता मिल गई।

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