रुड़की : डेढ़ साल पहले उत्तरप्रदेश के उन्नाव जिले के शफीपुर गांव का एक किशोर घर वालों की डांट के नाराज होकर घर से ट्रेन में बैठकर निकला तो नानी के घर के लिए था लेकिन गलत ट्रेन में बैठने के कारण रूड़की पहुंच गया और अपने घर का रास्ता भटक गया था। लेकिन आज सोशल मीडिया के माध्यम से एक बार फिर वो अपने परिजनों से मिल पाया है जिससे परिजनों की आखें भर आयी और खुशी के लहर है।

आपको बता दें रुड़की के ढंढेरा में लॉकडाउन लगने के बाद एक लड़का बिल्कुल अनाथ हो गया था क्योंकि वह उत्तरप्रदेश के उन्नाव जिले के शफीपुर का रहने वाला था और एक दिन वह अपने गाँव के पास मोहर्रम का मेला देखने गया लेकिन मेले में उसे रात हो गई, जिस पर घर वालों की डांट से डरकर वह अपनी नानी के घर जाने के लिए ट्रेन में बैठा लेकिन गलती से वह दूसरी ट्रेन में बैठ गया और ट्रेन से वह रुड़की उतर गया। साथ ही वह यहीं पर एक कबाड़ी के यहां काम करने लगा। उसका रहना खाना सोना सभी उसी कबाड़ी की दुकान पर ही होता था लेकिन लॉकडाउन लगने के बाद कबाड़ी वहाँ से अपना काम छोड़कर चला गया।

लॉकडाउन नें बच्चे के सामने खड़ा हुआ संकट

लॉकडाउन होने पर इस बच्चे के सामने बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया। अब उसके खाने पीने के भी लाले पड़ गए जिसके बाद ढंढेरा निवासी एक व्यक्ति इस 13 वर्षीय लड़के का सहारा बने और इसके खाने पीने रहने का इंतज़ाम किया। लगातार इस बच्चे के परिवार वालो को ढूंढने के प्रयास भी करते रहे, जिसके बाद इनकी मेहनत अब रंग लाई और राव इमरान के भतीजे ने सोशल मीडिया के माध्यम से इनके परिजनों से संपर्क कायम किया और आज इस बच्चे के माता, पिता और दादा आज रूड़की के ढंढेरा पहुंचे।

किशोर की माता की अपने बच्चे से मिलकर आँखें भर आईं और उन्होंने राव इमरान और अन्य लोगों का शुक्रिया अदा कर बताया कि उनका बेटा तकरीबन डेढ़ साल पहले अपने घर से मेला देखने गया था जिसके बाद वो लापता हो गया था जिसकी रिपोर्ट उन्होंने संबंधित थाने में भी लिखवाई थी। सोशल मीडिया के माध्यम से आज उनका बेटा उन्हें मिल पाया है जिसके लिए वे उनके शुक्रगुजार हैं जिसके बाद वो अपने बच्चे को लेकर अपने गाँव के लिए रवाना हो गए।

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