टिहरी: राज्य में ऑल वेदर रोड का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। दौरान मलबा डालने के लिए डंपिंग जोन बनाए गए हैं। इन जगहों पर मलाबा डालने के लिए मानक तय किए गए हैं। बावजूद निर्माण एजेंसी नियमों को अनदेखा कर मनमर्जी कर रही है। इसको लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार किया है। बदरीनाथ हाईवे पर निर्माण के दौरान गंगा नदी में मला डालने को लेकर टिहरी जिला प्रशासन ने कंपनी पर बड़ी कार्रवाई की है।

निर्माण एजेंसी पर 15 करोड़ 88 लाख 46 हजार 259 रुपये जुर्माना लगाया गया है। गंगा में मलबा फेंकने पर एक जेसीबी और तीन डंपर भी सीज कर इन पर भी करीब 70 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। टिहरी डीएम के निर्देश पर के 6 नवंबर को राजस्व विभाग, भूतत्व और खनिकर्म इकाई, पीडब्लूडी एनएच खंड और देवप्रयाग से कौड़ियाला के बीच काम कर रही इस्पान इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी की टीम ने बदरीनाथ हाईवे का संयुक्त निरीक्षण किया था।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार निरीक्षण के दौरान टीम को कई स्थानों पर अनियमितता मिलीं। पीडब्लूडी ने कौड़ियाला से देवप्रयाग के बीच भ्वींट और चिलपड़ा समेत आठ स्थानों में डंपिग जोन की अनुमति ली है, लेकिन इस्पान कंपनी इन डंपिंग जोन से बाहर भी रोड कटिंग का मलबा डंप कर रही है।

कीर्तिनगर एसडीएम आकांक्षा वर्मा ने बताया कि कंपनी ने डंपिंग जोन में निर्धारित क्षमता से अधिक मलबा रखा हुआ है। यह सीधे-सीधे रॉयल्टी का नुकसान है। इसके अलावा नदी किनारे दीवार न होने की वजह से मलबा गंगा नदी में गिर रहा है। जिससे नदी का पानी प्रदूषित हो रहा है। उन्होंने बताया कि इस्पान कंपनी पर लगभग 15 करोड़ 88 लाख जुर्माना लगाने की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेज दी गई है।

सोमवार को तहसीलदार मंजू राजपूत पुनरू हाईवे के निरीक्षण को निकली, तो उक्त दोनों डंपर और एक जेसीबी फिर से गंगा नदी में मलबा गिराते मिले। तहसीलदार ने तत्काल तीनों को सीज करते हुए तहसील कार्यालय देवप्रयाग में भिजवा दिया। एसडीएम आकांक्षा वर्मा ने बताया कि यह गंभीर मामला है। इस प्रकरण में एफआईआर भी दर्ज की जा सकती है।

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