हिमालय की लोग विरासत के वाहक के रूप में जिन्हें जाना जाता है किंतु सरकारी सुविधा इन्हें कभी नहीं मिल पाई। शिव सिंह काला ग्राम देबग्राम गिरा पोस्ट ऑफिस उरगम विकासखंड जोशीमठ जनपद चमोली उत्तराखंड के मूल निवासी हैं. शिव सिंह काला एक लोक संस्कृति के वाहक मुख्य रूप से विलुप्त हो रहे जागर का गायन करते हैं लेकिन 60 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद इन्हें आज तक संस्कृत विभाग की पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल पाया. सुदूर वादियों में प्रतिवर्ष नंदासवननूल भूमि क्षेत्रपाल एवं बगडवाल के गीत का गायन वसंत ऋतु एवं शरद ऋतु के समय नंदा पाती नंदा सेल पाती नंदा अष्टमी आदि आयोजनों पर उगम घाटी के अलावा दर्जनों गांव में गायन का का काम करते हैं। 60 वर्ष उम्र पार कर चुके हैं किंतु लोक संस्कृति की पेंशन योजना का लाभ नहीं ले नहीं मिल पा हैं।

सरकार लोक संस्कृति को बचाने और लोक कलाकारों के लिए कई योजना चलाने की बात करती है लेकिन इस वृद्ध की हालत को देख समझा जा सकता है कि सरकारी सिस्टम कितना लापरवाह है। सिस्टम की लापरवाही का जीता जागता उदाहरण है शिव सिंह काला जो अंतिम पड़ाव में पेंशन के लिए तरस रहे हैं। सरकार दावे करती है कि वो लोक कलाकारों के लिए पेंशन के साथ कई योजना लाई औऱ लोक संस्कृति को बचाने के लिए प्रयासरत है लेकिन सच्चाई सबके सामने है।

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