एक पटवारी सब पर भारी…ये कहावत सच साबित हुई उत्तराखंड के सेवलाकलां क्षेत्र में जहां के लेखपाल कुंवर सिंह सैनी आरटीआइ में भी जानकारी देने को तैयार नहीं हैं वो जुर्माना भरने को तैयान हैं लेकिन आरटीआई के लिए तैयार नहीं…जिसको देखते हुए सूचना आयोग ने उन पर 25 हजार रुपये का अधिकतम जुर्माना भी लगाया है लेकिन वो जुर्माना भरने के लिए तैयार है लेकिन सूचना देने को तैयार नहीं है। यही कारण है कि सूचना देने के बहाने लेखपाल ने राज्य सूचना आयुक्त चंद्र सिंह नपलच्याल से 10 मिनट का समय मांगा और फिर बार-बार कॉल किए जाने के बाद भी उनका फोन रिसीव नहीं किया जिससे सूचना आयुक्त का पारा चढ़ गया और लेखपाल पर कार्रवाई करने की बात कही।

आपको बता दें कि सूचना आयोग ने 17 जनवरी 2020 को आदेश दिया था कि वह मांगी गई सूचना 15 दिन में उपलब्ध कराए और साथ ही देरी होने पर लेखपाल पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। इसके बाद भी जब सूचना नहीं मिली तो अपील करने वाले व्यक्ति ने सूचना आयोग में इसकी शिकायत कर दी।  शिकायत पर सुनवाई करते हुए राज्य सूचना आयुक्त चंद्र सिंह नपलच्याल ने लेखपाल कुंवर सिंह सैनी को कॉल किया और पूछा कि क्यों आवेदन के 426 दिन बाद भी सूचना नहीं दी गई।

लेखपाल सैनी ने कहा कि आयोग के वाट्सएप नंबर पर मांगी गई सूचना भेज दी गई है। इसकी जांच करने पर पता चला कि जो पत्र भेजा गया है, वह किसी अन्य अपील से संबंधित है। लेखपाल ने आयोग से 10 मिनट का समय यह कहकर मांगा कि वह पत्रावली की जांच कर जवाब देंगे। जब लेखपाल का कॉल नहीं आया तो आयुक्त ने 15 मिनट बाद कॉल किया। फोन करने पर लेखपाल ने सूचना आयुक्त का फोन नहीं उठाया। बस फिर क्या था सूचना आयुक्त का पारा चढ़ गया औऱ इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए आयुक्त नपलच्याल ने कहा कि यह दूषित भावना को बयां करता है। साथ ही लेखपाल के इस तरह के व्यवहार को आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि ये दिखाता है कि जानबूझकर सूचना छुपाई गई हैं। उन्होंने उपजिलाधिकारी सदर को आदेश दिए कि वह लेखपाल कुंवर सिंह सैनी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए सक्षम अधिकारी को संस्तुति करें।

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