जिस प्रकार समाज में चारित्रिक लांछन का कोई बचाव नहीं है, उसी प्रकार कम्युनिस्ट पार्टियों के भीतर संशोधन- वाद का भी कोई बचाव नहीं  प्रमोद शाह  भारतीय राजनीति में अगर आप दिलचस्पी रखते है, तो कभी ना कभी राजनैतिक मुख्यधारा से इत्तर एक सशक्त विचारधारा के रूप में, जनता के संघर्षों में घिसे एक कार्यकर्ता […]



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