देहरादू: त्रिवेंद्र रावत सरकार जब से आई है, सरकार का ध्यान रोजगारपरक योजनाओं पर केंद्रित रहा। जिस सपने के बारे में केवल सोचा गया था कि पिरूल से बिजली बनाई जाएगी। योजनाएं बनी तो जरूर, लेकिन धरातल पर नहीं उतर पाई थीं। त्रिवेंद्र रावत ने मुख्यमंत्री बनने के बाद इसे अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बनाया और धरातल पर भी उतार कर दिखया। राज्य में पिरूल से बिजली उत्पानदन शुरू हो चुका है। इस योजना से जहां राज्यों के युवाओं को रोजगार मिलने लगा है। वहीं गांव की महिलाओं के लिए भी इससे रोजगार के रास्ते खुले हैं।

उत्तराखंड में त्रिवेंद्र सरकार ने रोजगार की दिशा में प्रदेशवासियों को एक बड़ी सौगात दी है। राज्य में कई जगहों पर पिरूल से बिजली बनाने का काम शुरू हो चुका है, जिससे ना सिर्फ युवाओं के लिए रोजगार के द्वार खुले हंै, ब्लकि आर्थिक स्थिति के साथ ही पहाड़ी महिलाओं के लिए भी रोजगार के नए आयाम स्थापित हुए है। जगंलो से पिरूल इकठ्ठा करने का काम स्थानीय महिलाओं को ही सौंपा गया है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उत्तरकाशी में पिरूल से उत्पादन होने वाली बिजली की पहली परियोजना की शुरूआत की थी।

जो पिरूल कभी आग लगने का कारण होता था। वह आज लोगों को रोजगार मुहैया करा रहा है। पिरूल उनकी रोजी-रोटी का साधन बना है। पिरूल हमेशा से ही राज्य के जंगलों में आग की वजह माना जाता रहा है। इसके कारण लगने वाली आग से जंगलों के पूरे इकोलॉजिकल सिस्टम को नुकसान पहुंचता है। लेकिन, त्रिवेंद्र सरकार की पहल से ये ही पिरूल राज्य की आर्थिकी के सुधार का और रोजगार का साधन बना है। इससे ना सिर्फ पर्यावरण को बचाया जा सकेगा। ब्लकि रोजगार के साथ ही राज्य को आर्थिक मदद भी मिलेगी।

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